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K-REAT का आदेश: East North VVS Realty घर खरीदार को 42 लाख रुपये लौटाए

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने बेंगलुरु की एक बिल्डर फर्म को घर खरीदार को 42 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का जिम्मेदार माना, लेकिन K-RERA द्वारा तय ब्याज अवधि घटा दी।

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आधिकारिक स्रोतKarnataka Real Estate Appellate Tribunal
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (K-REAT) ने 16 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया कि बेंगलुरु की साझेदारी फर्म East North VVS Realty को उस घर खरीदार को 42 लाख रुपये लौटाने होंगे, जिसे फ्लैट नहीं मिला। न्यायाधिकरण ने देनदारी से बचने की फर्म की कोशिश खारिज कर दी, लेकिन कर्नाटक रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (K-RERA) द्वारा तय ब्याज की अवधि घटा दी।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, घर खरीदार ने 29 नवंबर 2019 को "Nash Ville" परियोजना में एक अपार्टमेंट के लिए 42 लाख रुपये का पंजीकृत बिक्री समझौता किया था, और कब्जा 28 नवंबर 2020 तक मिलना था। खरीदार का कहना था कि पूरी कीमत चुका दी गई, लेकिन फ्लैट कभी नहीं सौंपा गया।

11 दिसंबर 2023 को K-RERA ने 64,46,190 रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था, जिसमें ब्याज 1 मई 2017 से गिना गया था। फर्म के साझेदार K-RERA के सामने पेश नहीं हुए।

फर्म ने अपील में दलील दी कि उसे शिकायत में पक्षकार नहीं बनाया गया और पैसा एक साझेदार कंपनी East North Realty Private Limited को मिला था। K-REAT ने यह दलील खारिज कर दी। न्यायाधिकरण ने माना कि 2020 में फर्म के पुनर्गठन के बाद कमान संभालने वाले प्रबंध साझेदार बिक्री समझौते के तहत फर्म की जिम्मेदारियों से इनकार नहीं कर सकते, और यह अपील फर्म के वैध दायित्वों से बचने की कोशिश है।

हालांकि न्यायाधिकरण ने रिकॉर्ड में एक स्पष्ट त्रुटि पाई: ब्याज 2017 से नहीं गिना जा सकता, जब न तो समझौता हुआ था और न ही कोई भुगतान दिखाया गया था। उसने आदेश में संशोधन किया कि फर्म 42 लाख रुपये SBI की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित ऋण दर (MCLR) से 2% अधिक सालाना ब्याज के साथ लौटाए। ब्याज 29 नवंबर 2019 से 24 मार्च 2025 तक लगेगा, जिस दिन फर्म ने राशि न्यायाधिकरण में जमा की थी। अपील की अवधि खत्म होने के बाद न्यायाधिकरण की रजिस्ट्री यह राशि खरीदार को जारी करेगी।

इसका क्या मतलब है

न्यायाधिकरण के अनुसार, बिल्डर फर्म के साझेदार बदलने से पंजीकृत बिक्री समझौते के तहत उसकी जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। फैसला यह भी पुष्ट करता है कि रिफंड पर ब्याज आमतौर पर समझौते की तारीख से गिना जाता है, उससे पहले की किसी तारीख से नहीं।

K-REAT के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है। कर्नाटक में कब्जे में देरी झेल रहे घर खरीदार K-RERA में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: K-REAT judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।