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कानूनी

K-REAT ने नितेश सीज़र्स पैलेस के खरीदार को देरी का ब्याज देने का आदेश दिया

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने K-RERA का आदेश रद्द कर बेंगलुरु के नितेश सीज़र्स पैलेस के प्रमोटरों को एक घर खरीदार को देरी का ब्याज देने का निर्देश दिया।

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आधिकारिक स्रोतKarnataka Real Estate Appellate Tribunal
Terracotta relief of the scales of justice on a brick wall

फ़ोटो: Chris Woodrich / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

कर्नाटक रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (K-REAT) ने 30 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (K-RERA) का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें बेंगलुरु की नितेश सीज़र्स पैलेस परियोजना के प्रमोटरों के खिलाफ एक घर खरीदार की शिकायत खारिज कर दी गई थी। न्यायाधिकरण ने माना कि यह RERA कानून के तहत एक चालू (ongoing) परियोजना थी और प्रमोटरों को खरीदार को देरी का ब्याज देने का निर्देश दिया।

क्या हुआ

खरीदार ने 29 सितंबर 2015 की रजिस्टर्ड सेल डीड के ज़रिये परियोजना में एक फ्लैट खरीदा था। फैसले के अनुसार, खरीदार की शिकायत थी कि बिजली और पानी के कनेक्शन, क्लबहाउस और स्विमिंग पूल जैसी वादा की गई सुविधाएं नहीं दी गईं, और परियोजना अपने हाथ में लेने वाली फर्म ने लागत बढ़ने के नाम पर 250 रुपये प्रति वर्ग फुट की मांग की।

K-RERA ने 10 मार्च 2025 को शिकायत यह कहकर खारिज कर दी थी कि कानून लागू होते समय परियोजना चालू नहीं थी, इसलिए RERA लागू नहीं होता। K-REAT इससे सहमत नहीं हुआ। उसने कहा कि कर्नाटक RERA नियम 11 जुलाई 2017 को लागू हुए, जबकि आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट 27 दिसंबर 2017 को ही मिला, और प्रमोटर के अपने आर्किटेक्ट का प्रमाणपत्र कानून के तहत कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के आधार पर कि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना कब्ज़ा खरीदार पर थोपा नहीं जा सकता, न्यायाधिकरण ने माना कि सेल डीड के समय फ्लैट सौंपना वैध कब्ज़ा नहीं था।

न्यायाधिकरण ने प्रमोटरों को पूरी बिक्री राशि पर सेल डीड की तारीख से 27 दिसंबर 2017 तक SBI MCLR plus 2% की दर से ब्याज 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया। उसने कहा कि खरीदार के दस्तावेज़ों में ऐसी कोई शर्त नहीं है, इसलिए वे एस्केलेशन शुल्क नहीं मांग सकते। परियोजना को RERA में पंजीकृत कराने का निर्देश देने की मांग उसने नहीं मानी।

इसका क्या मतलब है

बेंगलुरु की पुरानी परियोजनाओं के खरीदारों के लिए यह फैसला कहता है कि RERA लागू होगा या नहीं और वैध कब्ज़ा कब से माना जाएगा, यह ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने की असली तारीख से तय होता है, आवेदन की तारीख से नहीं। बिक्री दस्तावेज़ों में न लिखे अतिरिक्त शुल्क की बाद में की गई मांग को चुनौती दी जा सकती है। K-REAT के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: K-REAT judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।