कानूनी
J&K हाई कोर्ट ने बैंक मैनेजर दलीप कुमार भट की रिश्वत मामले में सजा बरकरार रखी
J&K हाई कोर्ट ने लोन की किस्त जारी करने के लिए 2010 में 5,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए J&K ग्रामीण बैंक के मैनेजर की सजा बरकरार रखी, पर जेल की अवधि घटाकर एक साल कर दी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को जम्मू रूरल बैंक (J&K ग्रामीण बैंक) की परगवाल शाखा के तत्कालीन मैनेजर दलीप कुमार भट की रिश्वत मामले में सजा बरकरार रखी। उन्हें 2010 में एक ट्रैप में लोन की किस्त जारी करने के बदले 5,000 रुपये लेते पकड़ा गया था। कोर्ट ने हर अपराध के लिए जेल की सजा दो साल से घटाकर एक साल कर दी और उन्हें एक महीने के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
क्या हुआ
फैसले में दर्ज अभियोजन के अनुसार, बैंक ने एक कर्जदार का 1 लाख रुपये का लोन मंजूर किया था और उसे 35,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी थी। शिकायत में आरोप था कि 65,000 रुपये की दूसरी किस्त जारी करने के लिए मैनेजर ने 7,000 रुपये मांगे और बाद में 5,000 रुपये पर राजी हुए। फैसले के अनुसार, विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन, जम्मू ने 14 जून 2010 को कर्जदार की दुकान पर ट्रैप लगाया और निशान लगे नोट मैनेजर की पिछली जेब से बरामद हुए।
18 फरवरी 2017 को स्पेशल जज, एंटी-करप्शन, जम्मू ने उन्हें जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की Section 5(1)(d) सहपठित Section 5(2) और रणबीर दंड संहिता की Section 161 के तहत दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने हर अपराध के लिए दो साल के साधारण कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा दी थी, जो साथ-साथ चलनी थी।
अपील में बचाव पक्ष ने कहा कि शिकायत झूठी थी और एक अहम गवाह मुकर गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि रिश्वत मांगने, लेने और बरामदगी के सबूत "ठोस और विश्वसनीय" हैं और सजा में दखल का कोई आधार नहीं है। ट्रायल करीब छह साल चला और अपील नौ साल लंबित रही, इसलिए कोर्ट ने हर अपराध के लिए जेल की सजा घटाकर एक साल कर दी। हर अपराध के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना बना रहेगा।
इसका क्या मतलब है
यह फैसला पुष्टि करता है कि मंजूर लोन जारी करने के बदले पैसे मांगने वाले बैंक अधिकारी को ट्रैप के सबूत पर दोषी ठहराया जा सकता है, भले ही एक गवाह मुकर जाए। अगर वे एक महीने में आत्मसमर्पण नहीं करते, तो ट्रायल कोर्ट सख्त कदम उठाएगा।
अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे, तो कर्जदार राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो में शिकायत कर सकते हैं; हर राज्य की हेल्पलाइन के लिए Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर है।
स्रोत: High Court judgment
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