बीमा
IRDAI: नवंबर 2026 'शिकायत निवारण माह', लंबित बीमा विवाद निपटाने पर जोर
IRDAI ने बीमा कंपनियों से नवंबर 2026 में लंबित पॉलिसीधारक शिकायतों की समीक्षा कर उन्हें निपटाने को कहा है। उपभोक्ता आयोगों और अदालतों में करीब 2.21 लाख मामले लंबित थे।
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) नवंबर 2026 में पूरे बीमा उद्योग में "शिकायत निवारण माह" चलाएगा। 29 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में नियामक ने कहा कि इसका मकसद पॉलिसीधारकों की लंबित शिकायतों और विवादों, खासकर लंबे समय से अटके मामलों, का निपटारा तेज करना है।
क्या हुआ
IRDAI ने कहा कि अनसुलझी शिकायतों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। 31 मार्च 2026 तक उपभोक्ता आयोगों और अदालतों में करीब 2.21 लाख मामले लंबित थे, और इनमें से लगभग 72.49% एक साल से ज्यादा समय से लंबित थे। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), जो सड़क दुर्घटना मुआवजे के दावे सुनता है, के सामने करीब 11 लाख मामले लंबित बताए गए।
इस महीने के दौरान बीमा कंपनियों को अपनी लंबित शिकायतों और विवादों की समीक्षा करने और ऐसे मामले पहचानने की सलाह दी गई है जिन्हें जल्दी सुलझाया जा सके। IRDAI ने उनसे कहा है कि वे लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता दें, लंबित मुकदमों की गुण-दोष के आधार पर समीक्षा करें और जहां कानूनी व तथ्यात्मक रूप से उचित हो वहां आपसी सहमति से निपटारा करें, बीमा लोकपाल के फैसलों का तुरंत पालन करें, दूसरे मंचों पर लंबित शिकायतें जल्दी निपटाएं, मुकदमों का प्रबंधन मजबूत करें और बार-बार आने वाली शिकायतों के कारण दूर करें।
नियामक ने कहा कि मकसद सिर्फ निपटाए गए मामलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष और टिकाऊ समाधान सुनिश्चित करना है। लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और काउंसिल फॉर इंश्योरेंस ओम्बड्समेन से इस पहल में सहयोग करने को कहा गया है। IRDAI इन काउंसिलों और राज्यवार लीड इंश्योरर्स के साथ देशभर में जागरूकता कार्यक्रम करेगा, जिनमें टियर-II और टियर-III शहरों पर खास जोर होगा, जहां शिकायत निवारण तक पहुंच सीमित है।
इसका क्या मतलब है
जिन पॉलिसीधारकों की शिकायत लंबे समय से लंबित है, क्लेम विवाद में है या बीमा लोकपाल के फैसले का भुगतान नहीं हुआ है, उनके लिए नवंबर 2026 एक मौका है, क्योंकि बीमा कंपनियों से ऐसे मामलों की समीक्षा कर जहां संभव हो निपटारा करने को कहा गया है। बीमा कंपनियों और काउंसिलों से कहा गया है कि वे शाखा स्तर पर और डिजिटल माध्यमों से इस पहल का प्रचार करें, ताकि पॉलिसीधारक इस महीने अपनी बीमा कंपनी से संपर्क कर सकें।
प्रेस विज्ञप्ति में कोई नया जुर्माना या समय-सीमा तय नहीं की गई है; यह बीमा कंपनियों के लिए एक सलाह है। जिन पॉलिसीधारकों के विवाद नहीं सुलझते, वे अब भी नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil के जरिए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: IRDAI press release
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।