कंपनी मामले
IBBI ने स्टील कंपनी मामले में कर्जदाताओं के वोट गिनने पर इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को 3 महीने निलंबित किया
IBBI ने एक इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को तीन महीने के लिए निलंबित किया है। IBBI के अनुसार SBI का हिस्सा हटाकर केवल 61.31% वोट वाली समाधान योजना को मंजूर घोषित किया गया।
भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने Shree Bhimeshwari Ispat Private Limited के दिवाला मामले में कर्जदाताओं के वोट गिनने के तरीके को लेकर एक इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल का प्राधिकार तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। IBBI की अनुशासन समिति का यह आदेश 30 अक्टूबर 2026 का है।
क्या हुआ
कंपनी की दिवाला प्रक्रिया राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ के आदेश से 28 नवंबर 2019 को शुरू हुई थी और प्रोफेशनल को 4 जनवरी 2020 को समाधान पेशेवर नियुक्त किया गया था। आदेश के अनुसार Khatav Man Taluka Agro Processing Limited की समाधान योजना को लेनदारों की समिति (योजना पर फैसला करने वाले कर्जदाता) में 61.31% वोट पक्ष में और 30.37% विपक्ष में मिले, जबकि 8.32% वोटिंग हिस्सेदारी वाले State Bank of India ने वोट नहीं डाला।
IBBI ने पाया कि प्रोफेशनल ने SBI का हिस्सा कुल से बाहर रखा, बाकी 91.68% में से नतीजा लगभग 67% निकाला और योजना को मंजूर घोषित कर दिया। कानून के तहत योजना को सभी वित्तीय लेनदारों की वोटिंग हिस्सेदारी का कम से कम 66% मिलना जरूरी है। समिति ने पाया कि योजना NCLT के सामने 67% समर्थन के साथ मंजूर बताकर पेश की गई और यह नहीं बताया गया कि SBI का हिस्सा हटाया गया था। NCLT ने 28 अप्रैल 2025 के आदेश में माना कि केवल 61.31% वोट पक्ष में थे और योजना को लेनदारों के पास वापस भेज दिया, जिससे IBBI के अनुसार टाली जा सकने वाली देरी हुई। प्रोफेशनल का तर्क था कि SBI वोटिंग से अनुपस्थित था, न कि उसने मतदान से परहेज किया।
इसका क्या मतलब है
आदेश साफ करता है कि जो कर्जदाता बैठक में शामिल होता है लेकिन वोट नहीं डालता, उसकी हिस्सेदारी भी यह तय करते समय कुल में गिनी जाती है कि योजना को जरूरी 66% मिला या नहीं। निलंबन आदेश के 30 दिन बाद लागू होगा। IBBI यह आदेश उन सभी कंपनियों की लेनदार समितियों को भेजेगा जहां यह प्रोफेशनल काम कर रहा है, ताकि वे इस पर विचार कर सकें। यह IBBI की पूरी हो चुकी नियामक कार्रवाई है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है।
स्रोत: IBBI disciplinary order
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