कानूनी
गुजरात हाई कोर्ट का रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर पर ACB का संपत्ति केस रद्द करने से इनकार
गुजरात हाई कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 को रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर कमलेश हरिलाल गोराडिया के खिलाफ ACB का आय से अधिक संपत्ति का मामला रद्द करने से इनकार कर दिया और कहा कि मुकदमा चलेगा।
गुजरात सरकार के रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर (क्लास-I) कमलेश हरिलाल गोराडिया की अपने खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला रद्द कराने की कोशिश नाकाम रही है। 21 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में गुजरात हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और अहमदाबाद के विशेष न्यायाधीश (ACB) को मुकदमा आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
क्या हुआ
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 6 जनवरी 2015 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की Section 13(1)(e) सहपठित Section 13(2) के तहत मामला दर्ज किया था, जो किसी लोक सेवक के पास ज्ञात वैध आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी है। FIR के अनुसार, 1 जनवरी 2000 से 31 दिसंबर 2008 की जांच अवधि में उनके पास ज्ञात आय से लगभग 1.04 करोड़ रुपये, यानी 213.08%, अधिक संपत्ति थी। फैसले के अनुसार, जांच के बाद ACB की चार्जशीट में यह आंकड़ा दोबारा गिनकर लगभग 2.32 करोड़ रुपये, यानी 455.88%, बताया गया।
उन्होंने FIR, चार्जशीट और मुकदमा रद्द करने की मांग की थी। उनकी दलीलों में यह शामिल था कि निवेश दो बार गिने गए, उपहार और परिवार की आय को नजरअंदाज किया गया, FIR और चार्जशीट के बीच आंकड़ा दोगुना हो गया और जांच में करीब छह साल लगे। कोर्ट ने कहा कि ये विवादित तथ्य हैं जिन्हें मुकदमे में सबूतों से परखा जाना है, और मामला रद्द करने की याचिका पर वह "मिनी-ट्रायल" नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जांच के बाद आंकड़ा बढ़ना अपने आप में मामला रद्द करने का आधार नहीं है, और देरी तेज सुनवाई मांगने का आधार हो सकती है, मामला खत्म करने का नहीं। कोर्ट ने पाया कि चार्जशीट से प्रथम दृष्टया, यानी पहली नजर में, मामला बनता है।
इसका क्या मतलब है
विशेष ACB केस नंबर 17/2021 अब मुकदमे में जाएगा, जहां उनके सभी बचाव खुले रहेंगे और ट्रायल कोर्ट हाई कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना उन पर फैसला करेगा। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
जिन नागरिकों से कोई अधिकारी रिश्वत मांगे, वे अपने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से शिकायत कर सकते हैं। Oquilia की गाइड में हर राज्य की हेल्पलाइन दी गई है: https://www.oquilia.com/report-a-bribe
स्रोत: High Court judgment
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