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गुजरात हाई कोर्ट: Axis Bank खाता अनफ्रीज करे, सिर्फ 18,413 रुपये पर लियन रहे

गुजरात हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को कहा कि साइबर क्राइम जांच के दौरान रकम और अवधि तय किए बिना पूरा बैंक खाता फ्रीज करना व्यापार और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।

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आधिकारिक स्रोतGujarat High Court
कानूनी / 26 अक्टूबर 2026

गुजरात हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को Axis Bank और जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि वे एक फर्म का करंट अकाउंट अनफ्रीज करें, जिसे एक साइबर क्राइम शिकायत के बाद फ्रीज कर दिया गया था। कोर्ट ने बैंक को जांच पूरी होने तक केवल 18,413.95 रुपये पर लियन, यानी रोक, रखने की अनुमति दी।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, फर्म ने नवंबर 2024 में सोना बेचा था और दिसंबर 2024 में उसे Axis Bank से ईमेल मिला कि उसके खाते पर 7,96,810 रुपये का लियन लगाया गया है, साथ में 30 नवंबर 2024 की एक साइबर क्राइम शिकायत भेजी गई। फर्म ने कोर्ट को बताया कि उसने बिक्री के सबूत के तौर पर पुलिस को GST बिल दिए थे। अगस्त 2025 में खाते से 7,96,810 रुपये काट लिए गए, और बैंक ने बाद में कहा कि यह एक न्यायिक आदेश के तहत हुआ। 28 जुलाई 2026 के पत्र में बैंक ने बताया कि बाकी लियन 18,413.95 रुपये है और खाता 21 अगस्त 2025 से फ्रीज है।

नोटिस मिलने के बावजूद प्रतिवादी कोर्ट में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां जांच के दौरान बैंक से खाता फ्रीज करने को कह सकती हैं, लेकिन खाताधारक को कारण और सीमा बताए बिना खाते को हमेशा के लिए फ्रीज नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने माना कि रकम और अवधि तय किए बिना पूरा खाता फ्रीज करना नागरिक के व्यापार, कारोबार और आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और संविधान के Article 21 के तहत सम्मान से जीने के अधिकार को कमजोर करता है। कोर्ट ने फर्म को लियन की रकम छोड़कर खाता पूरी तरह चलाने की अनुमति दी और बिना किसी खर्च के आदेश के याचिका का निपटारा कर दिया।

इसका क्या मतलब है

जिन खाताधारकों का पूरा खाता किसी साइबर क्राइम शिकायत के कारण फ्रीज कर दिया गया है, उनके लिए यह फैसला अहम हो सकता है: कोर्ट ने माना कि फ्रीज विवादित रकम तक सीमित होना चाहिए और बिना सूचना के अनिश्चित समय तक नहीं चलना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया है कि खाताधारक के आरोपी, सहयोगी या जानबूझकर अवैध पैसा पाने वाला होने को दिखाए बिना लगातार फ्रीज को सही नहीं ठहराया जा सकता। बैंक के खाते संबंधी व्यवहार से असंतुष्ट ग्राहक पहले बैंक से और फिर RBI से https://cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं। साइबर धोखाधड़ी के शिकार https://cybercrime.gov.in पर या 1930 पर शिकायत कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।