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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने ED द्वारा कुर्क जमीन के बदले 45 लाख रुपये की FD की अनुमति दी

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने ED की आपत्ति के बावजूद ग्लोबल एंट्रेड को ED द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क दो प्लॉट के बदले 45 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट देने की अनुमति दी।

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आधिकारिक स्रोतGauhati High Court
Global Entrade may replace two Sonapur plots attached by the ED, valued at Rs 38.4 lakh, with a Rs 45 lakh fixed deposit, to be made within four weeks with an exclusive lien for the ED.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: Gauhati High Court order, 4 November 2026

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुवाहाटी की एक साझेदारी फर्म ग्लोबल एंट्रेड को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अस्थायी रूप से कुर्क किए गए दो प्लॉट के बदले 45 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट देने की अनुमति दी है। 4 नवंबर 2026 के आदेश में अदालत ने ED के विरोध के बावजूद, सख्त शर्तों के साथ फर्म की अर्जी मंजूर की।

क्या हुआ

ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत असम के कामरूप (मेट्रो) जिले के सोनापुर में दो प्लॉट अस्थायी रूप से कुर्क किए थे, जिनकी कीमत कुर्की की कार्यवाही में 38.4 लाख रुपये आंकी गई थी। ED के अनुसार, फर्म उसकी अभियोजन शिकायत में आरोपी है और उसे अपराध की आय से जुड़े 45 लाख रुपये मिले थे, जिन्हें उसने आगे एक अन्य इकाई को भुगतान कर दिया। ED का कहना है कि प्लॉट उस रकम के मूल्य के बराबर संपत्ति के रूप में कुर्क किए गए। फर्म का कहना है कि उसने यह जमीन 2016 में स्वतंत्र धन से खरीदी थी।

ED ने तर्क दिया कि PMLA में कुर्क संपत्ति को फिक्स्ड डिपॉजिट से बदलने का प्रावधान नहीं है। अदालत ने माना कि कानून ऐसा कोई अधिकार नहीं देता, लेकिन कहा कि उपयुक्त मामले में वह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सुरक्षा की व्यवस्था तय कर सकती है। अदालत ने कहा कि पेश की गई डिपॉजिट प्लॉट की कीमत से अधिक है और उस पूरी रकम को कवर करती है जो ED के अनुसार फर्म को मिली थी।

फर्म को चार हफ्ते के भीतर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में 45 लाख रुपये की डिपॉजिट करनी होगी, जिस पर ED का विशेष लियन होगा, और धन के स्रोत का हलफनामा देना होगा। अगर ED को लगे कि यह रकम खुद अपराध की आय है तो वह दो हफ्ते में आपत्ति कर सकता है; वरना उसे प्लॉट कुर्की से मुक्त करने होंगे।

इसका क्या मतलब है

अदालत ने कहा कि वह कुर्की की वैधता या फर्म के दोष पर फैसला नहीं दे रही; ये सवाल संबंधित रिट याचिका और PMLA की कार्यवाही में तय होंगे। अस्थायी कुर्की की पुष्टि PMLA के तहत निर्णायक प्राधिकरण को करनी होती है, और वह कार्यवाही फिलहाल संबंधित रिट याचिका में अंतरिम आदेश से रुकी हुई है। अदालत ने कहा कि जिसकी भी संपत्ति कुर्क हुई हो, वह ऐसे बदलाव का हकदार नहीं है; हर मामला उसके तथ्यों पर निर्भर करता है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।