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गौहाटी हाई कोर्ट ने एक ही गिरवी ज़मीन पर Canara Bank और PNB का विवाद मध्यस्थता को भेजा

गौहाटी हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को कहा कि एक ही गिरवी ज़मीन पर Canara Bank और पंजाब नेशनल बैंक का विवाद SARFAESI कानून के तहत वैधानिक मध्यस्थता से सुलझेगा।

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आधिकारिक स्रोतGauhati High Court
Circular steel vault door with bolts and time locks

फ़ोटो: Joe Mabel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

गौहाटी हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को कहा कि असम के धेमाजी ज़िले की एक ही गिरवी ज़मीन पर Canara Bank और पंजाब नेशनल बैंक के बीच का विवाद SARFAESI कानून की धारा 11 के तहत मध्यस्थता से सुलझाया जाएगा। खंडपीठ ने ज़िला मजिस्ट्रेट का वह आदेश रद्द कर दिया जिसने नीलाम हुई ज़मीन खरीदार के नाम करने पर रोक लगा दी थी।

क्या हुआ

फ़ैसले के अनुसार, Canara Bank ने एक कर्ज़दार को इस ज़मीन को गिरवी रखकर 25 लाख रुपये का कर्ज़ दिया था। मार्च 2021 में खाते को एनपीए घोषित किया गया। बैंक ने SARFAESI कानून का सहारा लिया, जो कर्ज़दाताओं को अदालत गए बिना गिरवी संपत्ति ज़ब्त करके बेचने का अधिकार देता है। अगस्त 2024 में ज़िला मजिस्ट्रेट, धेमाजी ने बैंक को कब्ज़ा लेने की अनुमति दी। बैंक ने कब्ज़ा लेकर ज़मीन नीलाम की और रकम बकाये में समायोजित की।

मार्च 2025 में पंजाब नेशनल बैंक ने ज़िला मजिस्ट्रेट को बताया कि इसी कर्ज़दार ने 2019 में उसी संपत्ति पर उससे 17 लाख रुपये का कर्ज़ लिया था। इसके बाद ज़िला मजिस्ट्रेट ने Canara Bank को सुने बिना अपने पुराने आदेश पर रोक लगा दी और ज़मीन के रिकॉर्ड खरीदार के नाम न बदलने का निर्देश दिया। Canara Bank ने इसे चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के बीच बकाया रकम से जुड़े विवाद में SARFAESI कानून की धारा 11 के तहत मध्यस्थता अनिवार्य है। कोर्ट ने दोनों बैंकों को मध्यस्थता में जाने का निर्देश दिया और ज़िला मजिस्ट्रेट का 24 मार्च 2025 का रोक आदेश रद्द कर दिया। तथ्य और कानून के सभी सवाल मध्यस्थ के सामने खुले रहेंगे।

इसका क्या मतलब है

कोर्ट के अनुसार, जब दो कर्ज़दाता एक ही गिरवी संपत्ति पर दावा करें, तो रास्ता वैधानिक मध्यस्थता है, जिसके लिए बैंकों के बीच लिखित समझौते की ज़रूरत नहीं होती। कोर्ट ने नीलामी खरीदार को, जिसने कहा था कि उसने नेकनीयती से खरीदा, इस बीच राजस्व रिकॉर्ड में ज़मीन अपने नाम कराने की अनुमति दी, बशर्ते विवाद की पूरी जानकारी दिए बिना कोई तीसरा पक्ष हित न बनाया जाए। कर्ज़दारों और खरीदारों के लिए यह मामला बताता है कि कर्ज़ लेने या नीलामी में खरीदने से पहले संपत्ति पर मौजूदा भार की जांच क्यों ज़रूरी है। बैंक सेवा से जुड़ी शिकायत RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर की जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।