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कानूनी

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने CBI रिश्वत केस में लेफ्टिनेंट कर्नल अमित कुमार शर्मा की आरोपमुक्ति रद्द की

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने विशेष CBI अदालत का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें CBI द्वारा 10 लाख रुपये की रिश्वत के आरोपी सेना अधिकारी को आरोपमुक्त किया गया था, और नए सिरे से फ़ैसले का निर्देश दिया।

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आधिकारिक स्रोतGauhati High Court
A law library aisle between tall shelves of bound volumes

फ़ोटो: MaxnaCarta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

गुवाहाटी हाई कोर्ट की कोहिमा पीठ ने 5 नवंबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के भ्रष्टाचार मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल अमित कुमार शर्मा, तत्कालीन कमांडिंग ऑफ़िसर, 50 Coy ASC (Supply) Type C, दीमापुर (आर्मी सर्विस कोर की एक यूनिट) की आरोपमुक्ति रद्द कर दी। कोर्ट ने निजी व्यक्ति और सह-आरोपी कपिल कुमार शर्मा की आरोपमुक्ति भी रद्द की और मामला दीमापुर की विशेष CBI अदालत को दो महीने में नए सिरे से फ़ैसला करने के लिए वापस भेज दिया।

क्या हुआ

CBI की चार्जशीट के अनुसार, अधिकारी ने सह-आरोपी और तीसरे आरोपी एक सब-कॉन्ट्रैक्टर के साथ आपराधिक साज़िश में उसी सब-कॉन्ट्रैक्टर से 10 लाख रुपये की अवैध रिश्वत ली। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज हुआ था और नगालैंड में आर्मी सर्विस कोर की एक यूनिट को राशन आपूर्ति से जुड़ा है। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

18 नवंबर 2024 को दीमापुर के विशेष CBI जज ने अधिकारी और सह-आरोपी को यह कहते हुए आरोपमुक्त कर दिया था कि आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है। जज ने यह संभावना मानी थी कि 10 लाख रुपये का ट्रांसफ़र एक दोस्ताना कर्ज़ था। CBI ने इस आदेश को पुनरीक्षण याचिकाओं में चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि विशेष जज ने केवल एक सवाल देखा, कि 10 लाख रुपये कर्ज़ थे या रिश्वत, और चार्जशीट में दर्ज हर अपराध, जैसे साज़िश, धोखाधड़ी, उकसावे और आपराधिक कदाचार, के तत्वों की जांच नहीं की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा किए बिना पूरे मामले से एकमुश्त आरोपमुक्ति नहीं दी जा सकती, और आरोपमुक्ति का आदेश रद्द कर दिया।

इसका क्या मतलब है

कोर्ट ने आरोपियों के दोषी होने या न होने पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया। मामला अब विशेष CBI अदालत में लौटेगा, जिसे नए सिरे से देखना होगा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री है या नहीं; हाई कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यह काम आदेश मिलने के दो महीने में पूरा होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि चार्जशीट दिसंबर 2020 में और आरोपमुक्ति की अर्ज़ी नवंबर 2022 में दाख़िल हुई थी।

किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर इसकी शिकायत की जा सकती है; हर राज्य की भ्रष्टाचार-रोधी हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।