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कार्रवाई

ED ने नागपुर के बिल्डर प्रयाग डेवलपर्स पर तलाशी ली, 1.95 करोड़ रुपये नकद जब्त

ED ने प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के मालिक से जुड़े नागपुर के दो ठिकानों पर तलाशी लेकर 1.95 करोड़ रुपये नकद जब्त किए। ED का आरोप है कि गिरवी फ्लैट खरीदारों को बताए बिना बेचे गए।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
A fountain pen resting on a printed contract

फ़ोटो: Blogtrepreneur / Wikimedia Commons, CC BY 2.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 26 अक्टूबर 2026 को नागपुर जिले में प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के मालिक से जुड़े दो ठिकानों पर तलाशी ली। ED ने 1.95 करोड़ रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए, 40 लाख रुपये से ज्यादा के बैंक बैलेंस फ्रीज किए और कई ऐसी संपत्तियों की पहचान की जिनके बारे में उसे संदेह है कि वे अपराध की कमाई से खरीदी गईं।

क्या हुआ

ED का केस नागपुर के अजनी थाने और राणाप्रतापनगर थाने में IPC की धारा 418 और 420 के तहत दर्ज FIR पर आधारित है।

ED के अनुसार, एक मामले में बिल्डर ने एक वरिष्ठ नागरिक विधवा की जमीन के लिए विकास समझौता किया, जिसके तहत उसे 1.75 करोड़ रुपये देने और 14 फ्लैट आवंटित करने थे। ED का आरोप है कि उसने फ्लैट तय करने वाला डीड महिला की जानकारी और सहमति के बिना रद्द कर दिया, फ्लैट तीसरे पक्षों को 8.93 करोड़ रुपये में बेच दिए और समझौते के तहत बकाया 45 लाख रुपये रोक लिए। ED ने महिला का कुल गलत नुकसान 9.4 करोड़ रुपये आंका है।

ED ने कहा कि दिव्य प्रयाग अपार्टमेंट प्रोजेक्ट में 22 फ्लैट 22 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लोन के बदले दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) के पास गिरवी थे, जिसमें से 11 करोड़ रुपये जारी हुए थे। ED का आरोप है कि ये फ्लैट कर्ज देने वाले से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिए बिना और खरीदारों को गिरवी के बारे में बताए बिना बेचे गए, और होम लोन के लिए एक बैंक को गिरवी छिपाने वाला झूठा हलफनामा दिया गया। ED के अनुसार, बाद में 12.84 करोड़ रुपये का बकाया सामने आया और SARFAESI कानून के तहत कार्यवाही शुरू हुई; यह कानून कर्जदाताओं को गिरवी संपत्ति अपने कब्जे में लेने की अनुमति देता है। ED को संदेह है कि इससे फ्लैट खरीदारों को नुकसान हुआ।

इसका क्या मतलब है

घर खरीदारों के लिए यह मामला दिखाता है कि यह जानना क्यों जरूरी है कि फ्लैट पहले से किसी कर्जदाता के पास गिरवी है या नहीं: ED के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में कर्जदाता का बकाया नहीं चुका और वसूली की कार्यवाही शुरू हुई। ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

इस रिपोर्ट में आपका नाम है, या कोई गलती दिखी? सुधार और जवाब के लिए लिखें: editor@oquilia.com