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कार्रवाई

कोरवियो कॉइन क्रिप्टो धोखाधड़ी केस: ED ने ट्राइसिटी में तलाशी ली, 72 लाख रुपये जब्त

ED ने कोरवियो कॉइन (KRO) मामले में चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में तलाशी लेकर 72 लाख रुपये नकद जब्त किए और योजना के कथित मुख्य संचालक के एक सहयोगी को गिरफ्तार किया।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
Rows of old bound law reports on a dark shelf

फ़ोटो: Dominic / Wikimedia Commons, CC0 1.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसके शिमला सब-जोनल कार्यालय ने कोरवियो कॉइन (KRO) क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 28 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में कई जगहों पर तलाशी ली। एजेंसी के अनुसार, तलाशी में 72 लाख रुपये नकद, संपत्ति के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और बैंक रिकॉर्ड जब्त किए गए और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

क्या हुआ

ED के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति योजना के कथित मुख्य संचालक का करीबी सहयोगी है, उससे मिलने दुबई गया था और FIR दर्ज होने के बाद भी उसके लिए सम्मेलन और कार्यक्रम आयोजित करता रहा। शिमला की विशेष PMLA अदालत ने, जिसके सामने उसे 29 अक्टूबर 2026 को पेश किया गया, उसे 5 नवंबर 2026 तक ED की हिरासत में भेजा।

ED का केस हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस की FIR पर आधारित है। ED का आरोप है कि मुख्य आरोपी और उसके सहयोगियों ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग योजना चलाई और ऊंचे निश्चित रिटर्न का वादा कर लोगों से कोरवियो कॉइन में निवेश करवाया। ED के अनुसार, योजना पोंजी मॉडल पर चलती थी, जिसमें नए निवेशकों का पैसा पुराने निवेशकों को दिया जाता था।

ED ने कहा कि बरामद डिजिटल डेटा के अनुसार 2.48 लाख से ज्यादा उपयोगकर्ता प्रभावित हुए, लेनदेन 219 मिलियन डॉलर से अधिक का था और निवेशकों का अनुमानित नुकसान करीब 500 करोड़ रुपये है। ED का आरोप है कि निवेशकों का पैसा ज्यादातर नकद में लिया गया, टीम लीडरों के जरिए आगे भेजा गया, कुछ हिस्सा कम रजिस्टर्ड कीमत पर संपत्ति खरीदने में लगा और कुछ क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया। ED ने कहा कि मुख्य आरोपी दुबई में है और उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।

ED के अनुसार, 13 दिसंबर 2025 और 15 जून 2026 की पिछली तलाशी में करीब 1.5 करोड़ रुपये की चल संपत्ति जब्त हुई थी। पांच सहयोगी पहले गिरफ्तार हो चुके हैं और उनके खिलाफ शिमला की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायतें दायर हैं।

इसका क्या मतलब है

ऐसी योजना में पैसा गंवाने वाले निवेशक https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर सकते हैं।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

इस रिपोर्ट में आपका नाम है, या कोई गलती दिखी? सुधार और जवाब के लिए लिखें: editor@oquilia.com