कार्रवाई
ED ने 569 करोड़ रुपये के फर्जी सॉफ्टवेयर आयात मामले में दिल्ली, कोलकाता में 7 ठिकानों पर तलाशी ली
ED ने कहा कि उसने दिल्ली और कोलकाता में सात ठिकानों पर तलाशी ली। ED का आरोप है कि फर्जी सॉफ्टवेयर आयात बिलों के सहारे 569.03 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए।

फ़ोटो: Chris Woodrich / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 नवंबर 2026 को बताया कि उसके विशाखापत्तनम सब-ज़ोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दिल्ली और कोलकाता में सात ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऐसे कस्टमाइज़्ड सॉफ्टवेयर के भुगतान के नाम पर 569.03 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए, जो कभी आयात ही नहीं हुआ।
क्या हुआ
ED ने कहा कि उसकी जांच आयकर विभाग की शिकायत पर विशाखापत्तनम के M.V.P. पुलिस थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई। ED के अनुसार, मुख्य आरोपी ने अपने पिता और अन्य लोगों के साथ मिलकर कोलकाता में पंजीकृत कार्यालयों वाली कई कंपनियां बनाईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोले।
ED का आरोप है कि इन खातों से सिंगापुर, हांगकांग और चीन की पांच कंपनियों को 569.03 करोड़ रुपये भेजे गए, बैंकों को विदेशी कंपनियों के गढ़े हुए बिल दिए गए और कोई सॉफ्टवेयर आयात नहीं हुआ।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि 2014-17 के दौरान ये रकम एक ऐसे व्यक्ति के कहने पर भेजी गई, जो सीमा शुल्क चुकाए बिना सौंदर्य प्रसाधन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कपड़े भारत में तस्करी से लाता था और जिसे पहले तीन बार COFEPOSA के तहत हिरासत में लिया जा चुका है। COFEPOSA तस्करी रोकने के लिए निवारक हिरासत का कानून है। ED के अनुसार, यह पैसा सिंगापुर और हांगकांग की नामित निदेशकों वाली कंपनियों में रखा गया और फिर आगे भेजा गया, और इसका एक हिस्सा नई दिल्ली के फर्जी पतों से चल रही फर्जी फर्मों के जरिए भेजा गया।
ED ने इस मामले में अपराध की आय प्रथम दृष्टया लगभग 1,500 करोड़ रुपये आंकी है। उसने बताया कि तलाशी में 47 लाख रुपये नकद, USD 5,900, 2,200 AED और 5,600 RMB/CNY विदेशी मुद्रा के साथ दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
ED के बताए अनुसार यह मामला दिखाता है कि बिल गढ़कर आयात के लिए होने वाले बैंक भुगतान का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है। तलाशी और जब्ती जांच का एक कदम है, अदालत का निष्कर्ष नहीं।
अगर कोई आपको किसी और के भुगतान के लिए अपने नाम पर कंपनी या बैंक खाता खोलने के बदले पैसे की पेशकश करे, तो मना करें। संदिग्ध वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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