कार्रवाई
Hashpe क्रिप्टो योजना मामले में ED ने अभियोजन शिकायत दायर की, 14.16 करोड़ रुपये कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय ने Hashpe मामले में अभियोजन शिकायत दायर कर 14.16 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। ED का आरोप है कि यह क्रिप्टो निवेश योजना रोज़ 1% रिटर्न का वादा करती थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पैन इंडिया क्रिप्टो करेंसी (Hashpe) मामले में पुडुचेरी की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की है और लगभग 14.16 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। यह जानकारी 3 नवंबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है। ED के चेन्नई ज़ोनल कार्यालय-II ने ये दोनों कदम 30 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत उठाए।
क्या हुआ
कुर्क संपत्ति में तमिलनाडु, हरियाणा और नई दिल्ली की अचल संपत्तियां, एक BMW कार और बैंक बैलेंस शामिल हैं। ED का मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, पुडुचेरी की भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज FIR पर आधारित है।
ED के अनुसार, Hashpe के प्रमोटरों ने वेबसाइट hashpe.io और मल्टी-लेवल मार्केटिंग नेटवर्क के ज़रिये लोगों से पैसा जुटाया और रोज़ 1% रिटर्न, निवेश का तीन गुना तक रिटर्न, रेफरल कमीशन और लग्ज़री कार व विदेश यात्रा जैसे इनाम का वादा किया। ED का आरोप है कि प्लेटफॉर्म ने TCX और Hashpe समेत फर्ज़ी कॉइन पेश किए, असली ट्रेडिंग के बिना मुनाफा दिखाया और नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों और "Leaders" कहे जाने वाले एजेंटों को भुगतान किया। ED के मुताबिक, बाद में निकासी रोक दी गई और प्लेटफॉर्म बंद कर दिया गया, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ।
ED का आरोप है कि लगभग 112.91 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिनका एक हिस्सा लौटाया गया, और बाकी रकम HIFY Circle और अन्य के खातों व क्रिप्टो वॉलेट से घुमाकर निजी खर्चों, कर्ज़ चुकाने, कमीशन, कार्यक्रमों और संपत्ति खरीदने में लगाई गई। ED ने अपराध की कमाई लगभग 49.54 करोड़ रुपये आंकी है। 1 सितंबर 2026 को तलाशी के बाद चार आरोपियों को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया, जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की की पुष्टि PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को करनी होगी, और अब अदालत अभियोजन शिकायत पर सुनवाई करेगी। रोज़ तय रिटर्न, निवेश कई गुना करने और रेफरल इनाम के वादे आम चेतावनी संकेत हैं। ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा गंवाने वाला कोई भी व्यक्ति https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर सकता है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी तब तक निर्दोष माने जाते हैं जब तक अदालत में उनका दोष साबित न हो, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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