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कार्रवाई

ED ने सिरोंज जनपद पंचायत के पूर्व CEO शोभित त्रिपाठी के खिलाफ PMLA शिकायत दायर की

ED ने भोपाल में जनपद पंचायत के एक पूर्व CEO और दो अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की है। ED का आरोप है कि विवाह सहायता योजना के 30.18 करोड़ रुपये 5,923 संदिग्ध मामलों में बांटे गए।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
A law library aisle between tall shelves of bound volumes

फ़ोटो: MaxnaCarta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने जनपद पंचायत, सिरोंज के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शोभित त्रिपाठी और दो अन्य लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत भोपाल की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की है। ED का आरोप है कि मध्य प्रदेश की विवाह सहायता योजना के सरकारी पैसे का धोखाधड़ी से वितरण किया गया। अभियोजन शिकायत ED की चार्जशीट जैसी होती है।

क्या हुआ

ED के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना में पंजीकृत गरीब निर्माण श्रमिकों की बेटियों को 51,000 रुपये दिए जाते थे। ED का आरोप है कि 2019 से नवंबर 2021 तक CEO रहते हुए इस अधिकारी ने दूसरों के साथ मिलीभगत कर 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता मामलों में 30.18 करोड़ रुपये मंजूर और वितरित किए।

ED का केस आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल द्वारा IPC की धारा 420, 409 सहपठित 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(e) और 13(2) के तहत दर्ज FIR पर आधारित है।

ED का आरोप है कि योजना का लाभ लेने के लिए जाली और फर्जी आवेदन फॉर्म और अपात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के अनुसार, पैसा अपात्र लाभार्थियों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना खोले गए बैंक खातों में भेजा गया और फिर कई किस्तों में तुरंत नकद निकाल लिया गया। ED ने यह भी कहा कि COVID-19 लॉकडाउन के दौरान, जब सामूहिक विवाह पर रोक थी, अपात्र लोगों को लाभ दिया गया।

ED ने बताया कि उसने 28 अक्टूबर 2026 को इस अधिकारी और एक सहयोगी के नाम की अचल संपत्तियां कुर्क कीं, और तलाशी में दस्तावेज बरामद हुए। एजेंसी के अनुसार, अधिकारी को 2 सितंबर 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह न्यायिक हिरासत में हैं।

इसका क्या मतलब है

यह मामला गरीब निर्माण श्रमिकों के परिवारों के लिए रखे गए पैसे से जुड़ा है। अब विशेष अदालत शिकायत पर सुनवाई करेगी, और ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

इस रिपोर्ट में आपका नाम है, या कोई गलती दिखी? सुधार और जवाब के लिए लिखें: editor@oquilia.com