कार्रवाई
पारेख एल्युमिनेक्स बैंक धोखाधड़ी मामले में ED ने 53.95 करोड़ रुपये की और संपत्ति कुर्क की
प्रवर्तन निदेशालय ने 53.95 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ED का आरोप है कि इस मामले में बैंकों के एक समूह को लगभग 2,296 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई ज़ोन-I ने 2 नवंबर 2026 की अपनी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य से जुड़े एक मामले में 53.95 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। ED का आरोप है कि इंडियन ओवरसीज़ बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह में कंपनी के लोन खाते लगभग 2,296 करोड़ रुपये के लिए डूबे कर्ज़ घोषित किए गए। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल लगभग 546 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।
क्या हुआ
ED के अनुसार, उसकी जांच CBI, आर्थिक अपराध शाखा, मुंबई और आर्थिक अपराध ब्यूरो, मुंबई द्वारा पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई। ये FIR भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) और 13(2) के तहत दर्ज हैं।
ED का आरोप है कि कंपनी ने स्टॉक और देनदारों के बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए विवरण जमा करके बैंकों के समूह से धोखे से लोन लिए, और बाद में उसके लोन खाते लगभग 2,296 करोड़ रुपये के लिए NPA, यानी ऐसे कर्ज़ जिनकी अदायगी रुक गई है, घोषित किए गए। एजेंसी का आरोप है कि एक कारोबारी समूह ने विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों के ज़रिए अपराध की आय में से 110.54 करोड़ रुपये इधर-उधर करने में मदद की, और इसी समूह को लाभार्थी के रूप में लगभग 70.25 करोड़ रुपये मिले। ED के मुताबिक अपराध की कुल आय 2,296.58 करोड़ रुपये है, जिससे इंडियन ओवरसीज़ बैंक और सोलह अन्य बैंकों के समूह को गलत तरीके से नुकसान हुआ।
ED इस मामले में पहले ही लगभग 493 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुका था। विज्ञप्ति के अनुसार, विशेष अदालत (PMLA), मुंबई में अभियोजन शिकायत दायर की गई है, और अदालत ने अपराध का संज्ञान ले लिया है। एजेंसी के मुताबिक आगे की जांच जारी है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की के दौरान मालिक इन संपत्तियों को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकता, लेकिन यह अंतिम नहीं है: PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को इसकी पुष्टि करनी होती है। विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि बैंकों के नुकसान में से कितनी वसूली हुई है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोषी साबित होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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