कार्रवाई
ED ने PMLA के तहत मुंबई की लांबट बिल्डिंग समेत 4 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की
ED के मुंबई कार्यालय ने कहा कि उसने लगभग 4 करोड़ रुपये की एक इमारत और बैंक बैलेंस अस्थायी रूप से कुर्क किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि मामले में जाली संपत्ति दस्तावेज़ और दबाव का इस्तेमाल हुआ।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई ज़ोनल कार्यालय ने 5 नवंबर 2026 को बताया कि उसने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत लगभग 4 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। एजेंसी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई की लांबट बिल्डिंग नाम की एक इमारत और आरोपियों के बैंक बैलेंस शामिल हैं।
क्या हुआ
ED ने कहा कि उसकी जांच दादर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू हुई, जिसकी बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने जांच की। FIR आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाज़ी और जाली दस्तावेज़ों के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ी है।
ED के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर इमारत के असली मालिक का रूप धरकर और कन्वेयंस डीड समेत जाली दस्तावेज़ बनाकर लांबट बिल्डिंग पर कब्ज़ा करने की साज़िश रची। एजेंसी का आरोप है कि 2019 में एक आरोपी ने मालिकों को धमकाकर और दबाव डालकर इमारत का 50% हिस्सा हासिल किया, और मालिकों को बिना किसी भुगतान के उनके हिस्से से बेदखल कर दिया गया।
ED का यह भी आरोप है कि इसके बाद संपत्ति आरोपियों से जुड़े एक व्यक्ति के रिश्तेदार के नाम कर दी गई, और लगातार किए गए हस्तांतरण इस तरह रचे गए कि कथित वसूली और दबाव से हासिल संपत्ति वैध सौदा लगे। एजेंसी के मुताबिक, इमारत अब उसी रिश्तेदार के नाम पर है।
जांच के आधार पर ED ने इमारत के साथ मुख्य आरोपी और अन्य आरोपियों के बैंक बैलेंस कुर्क किए। एजेंसी ने कहा कि आगे की जांच जारी है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की के दौरान मामले के चलते संपत्ति को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यह अंतिम आदेश नहीं है: PMLA के तहत इस कुर्की की पुष्टि न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) को करनी होती है, जिसके सामने संपत्ति रखने वाले इसे चुनौती दे सकते हैं।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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