कार्रवाई
PEC Limited लोन मामले में ED ने राउरकेला मॉल की 24.60 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की
प्रवर्तन निदेशालय ने राउरकेला के एक मॉल की तीन मंजिलें, जिनकी कीमत 24.60 करोड़ रुपये है, अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। ED का आरोप है कि PEC Limited से मिला कर्ज़ मां तारिणी इंडस्ट्रीज़ ने दूसरी जगह लगाया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मां तारिणी इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (MTIL) और अन्य से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 24.60 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। यह जानकारी 3 नवंबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है। कुर्क संपत्ति ओडिशा के राउरकेला में छेंड स्थित प्लूटो प्लाज़ा मॉल का भूतल, पहली मंजिल और दूसरी मंजिल का एक हिस्सा है, जो प्लूटो प्लाज़ा प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है।
क्या हुआ
ED के भुवनेश्वर ज़ोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की है। जांच CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, भुवनेश्वर की FIR के आधार पर शुरू हुई, जो भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत MTIL, उसके निदेशकों और भारत सरकार के उपक्रम PEC Limited के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज है।
FIR के अनुसार, MTIL ने PEC के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अपनी वित्तीय स्थिति गलत बताकर और संपत्तियों पर मौजूदा देनदारियां छिपाकर लौह अयस्क खरीदने के लिए 19.40 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता धोखे से ली। एक संबंधित कंपनी, तथागत एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, ने भी PEC से 16 करोड़ रुपये लिए थे। ED के मुताबिक, कर्ज़ के NPA होने के समय PEC का कुल बकाया ब्याज सहित लगभग 56.89 करोड़ रुपये था।
ED का आरोप है कि PEC का पैसा MTIL और तथागत एक्सपोर्ट्स के बैंक खातों से घुमाकर MTIL के पूर्व शेयरधारकों को शेयरों के भुगतान में लगाया गया। ED के अनुसार, एक पूर्व शेयरधारक और उनसे जुड़ी इकाइयों को लगभग 15.31 करोड़ रुपये मिले, जो आनुपातिक ब्याज जोड़कर 24.60 करोड़ रुपये बनते हैं, और यह पैसा कई खातों से होकर नकद निकासी, निवेश और कारोबारी खर्चों में लगाया गया। ED के अनुसार यही व्यक्ति प्लूटो प्लाज़ा प्राइवेट लिमिटेड को नियंत्रित करते हैं, और इस कंपनी की मॉल संपत्ति को कथित अपराध की कमाई के बराबर मूल्य के रूप में कुर्क किया गया है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की के बाद मालिक फिलहाल संपत्ति बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकता। यह अंतिम आदेश नहीं है: PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को इसकी पुष्टि करनी होगी, और मालिक इसे चुनौती दे सकता है। यह मामला एक सरकारी उपक्रम के दिए कर्ज़ से जुड़ा है, और ED का कहना है कि आगे की जांच जारी है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी तब तक निर्दोष माने जाते हैं जब तक अदालत में उनका दोष साबित न हो, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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