कार्रवाई
DHFL बैंक लोन धोखाधड़ी जांच में ED ने 40.40 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं
प्रवर्तन निदेशालय ने करजत की जमीन और नई दिल्ली के एक प्लॉट समेत 40.40 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। ED का आरोप है कि DHFL का पैसा फर्जी सेवाओं के बदले दो फर्मों को भेजा गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बैंक लोन धोखाधड़ी मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में PMLA, 2002 के तहत 40.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। एजेंसी ने 2 नवंबर 2026 को यह जानकारी दी। इनमें महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के करजत में जमीन के टुकड़े और नई दिल्ली के शांति निकेतन में एक आवासीय प्लॉट शामिल हैं।
क्या हुआ
ED के अनुसार, DHFL ने वित्त वर्ष 2018-19 में 40.40 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित रकम मुंबई की दो प्रोपराइटरशिप फर्मों को ऐसी सेवाओं के भुगतान के नाम पर भेजी, जो एजेंसी के मुताबिक कभी दी ही नहीं गईं।
ED का मामला CBI की उस FIR पर आधारित है, जो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से दी गई शिकायत पर दर्ज हुई थी। FIR के अनुसार, प्रमोटरों और अन्य ने उन बैंकों को धोखा देने की साजिश रची, जिन्होंने DHFL को 42,871 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाएं मंजूर की थीं। FIR में बैंकों को लगभग 34,615 करोड़ रुपये के गलत नुकसान का आरोप है।
ED का आरोप है कि करीब 11,549 करोड़ रुपये एक फर्जी "बांद्रा ब्रांच" के जरिये DHFL से प्रमोटरों से जुड़ी 87 इकाइयों को भेजे गए, जहां इन कर्जों को लगभग 2.60 लाख फर्जी खुदरा कर्जदारों के नाम पर होम लोन के रूप में दिखाया गया। एजेंसी ने बताया कि वह मुंबई की विशेष PMLA अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत और उसके बाद पांच और आरोपियों के खिलाफ पूरक शिकायत दायर कर चुकी है। ED के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को तलाशी के दौरान उसने लगभग 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 51.75 करोड़ रुपये) फ्रीज किए थे।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की के बाद मामला चलने तक इन संपत्तियों को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। यह अंतिम नहीं है: PMLA के निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) को इसकी पुष्टि करनी होगी। ED ने कहा है कि उसका लक्ष्य अपराध की रकम कंसोर्टियम बैंकों को लौटाना है और आगे की जांच जारी है। रिलीज में यह नहीं बताया गया है कि बैंकों को पैसा कब तक मिल सकता है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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