कार्रवाई
Unity Infraprojects बैंक कर्ज़ मामले में ED ने कोलकाता की 85.20 करोड़ रुपये की ज़मीन कुर्क की
ED के अनुसार, उसने Unity Infraprojects मामले में कोलकाता की 85.20 करोड़ रुपये की 14.51 एकड़ ज़मीन अस्थायी रूप से कुर्क की है; CBI की FIR में 23 बैंकों से धोखाधड़ी का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा है कि उसने M/s Unity Infraprojects Limited (UIL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता में लगभग 14.51 एकड़ ज़मीन, जिसकी कीमत 85.20 करोड़ रुपये है, अस्थायी रूप से कुर्क की है। ED की 23 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, यह ज़मीन M/s Suburban Agriculture Dairy & Fisheries Pvt. Ltd. के नाम पर है, जिसे एजेंसी UIL की स्टेप-डाउन सहायक कंपनी बताती है।
क्या हुआ
ED के मुंबई ज़ोनल ऑफिस-II ने कहा कि उसकी जांच CBI की बैंक सिक्योरिटीज़ एंड फ्रॉड ब्रांच, मुंबई द्वारा State Bank of India की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई। FIR में आरोप है कि UIL ने अपने प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर 23 बैंकों के समूह से लगभग 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज़ लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की; ब्याज सहित कुल कथित बकाया लगभग 3,800 करोड़ रुपये है।
ED के अनुसार, UIL का पैसा उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी M/s Unity Realty & Developers Ltd. के ज़रिए घुमाया गया और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से संपत्तियां ख़रीदने में लगाया गया। ED का आरोप है कि लेन-देन की एक श्रृंखला मौजा चकगरिया की ज़मीन को UIL और उसकी समूह कंपनियों के पैसे से जोड़ती है। एजेंसी ने संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण रोकने के लिए उसे PMLA की Section 5(1) के तहत कुर्क किया।
ED ने कहा कि जुलाई 2025 में छापों के दौरान उसने 31.21 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां ज़ब्त या फ्रीज़ की थीं, और तीन आदेशों के ज़रिए लगभग 1,493 करोड़ रुपये की ज़मीन और फ्लैट कुर्क किए थे, जिनकी पुष्टि बाद में PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण ने की। इस कुर्की के साथ मामले में कुर्क या फ्रीज़ की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 1,609 करोड़ रुपये हो गया है। 27 मार्च 2026 को मुंबई की नामित विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की गई थी, और जांच जारी है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की एक अस्थायी रोक है, जो मामला चलने तक मालिक को संपत्ति बेचने या हस्तांतरित करने से रोकती है। इसे पक्का होने से पहले PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण की पुष्टि ज़रूरी है, और यह इस बात का निष्कर्ष नहीं है कि पैसे का शोधन हुआ; इसका फ़ैसला अदालत में होगा।
विज्ञप्ति में 23 कर्ज़दाता बैंकों के समूह का ज़िक्र है, लेकिन यह नहीं कहा गया है कि किसी जमाकर्ता का पैसा प्रभावित हुआ है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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