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कार्रवाई

ड्रीम मेकर्स ग्लोबल जमा योजना केस में ED ने 85.19 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

ED ने ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड मामले में करीब 85.19 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ED का आरोप है कि कंपनी ने 150 दिन में पैसा दोगुना करने का वादा किया।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
Circular steel vault door with bolts and time locks

फ़ोटो: Joe Mabel / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 31 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसके चेन्नई जोनल कार्यालय-II ने ड्रीम मेकर्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (DMGPL) और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत करीब 85.19 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ED का आरोप है कि कंपनी ने ऊंचे दैनिक रिटर्न और 150 दिन में निवेश दोगुना करने का वादा कर हजारों जमाकर्ताओं से पैसा जुटाया।

क्या हुआ

ED का केस आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), कोयंबटूर द्वारा भारतीय दंड संहिता, तमिलनाडु जमाकर्ता हित संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठान) अधिनियम, 1997 और अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत दर्ज FIR पर आधारित है।

ED के अनुसार, DMGPL और उसके प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों ने सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट और पैकेज में निवेश के नाम पर जमाकर्ताओं से बड़ी रकम जुटाई। ED ने कहा कि शुरुआत में रिटर्न दिए गए, लेकिन बाद में भुगतान रुक गए और जमाकर्ताओं को भारी नुकसान हुआ; उसका आरोप है कि पैसे का दुरुपयोग कर उसे दूसरी जगह लगाया गया।

ED का आरोप है कि निवेशकों के करीब 400 करोड़ रुपये DMGPL के तीन मुख्य बैंक खातों में आए। एजेंसी के अनुसार, यह पैसा कंपनी और उसके प्रमुख लोगों के नाम के कई खातों और एजेंटों, फ्रेंचाइजी और जुड़े कारोबारों के जरिए आपसी ट्रांसफर, नकद निकासी और सहयोगियों को भुगतान से आगे भेजा गया। ED ने कहा कि जांच में संपत्ति, वाहन, सोने के गहने और अन्य संपत्तियों की खरीद और एजेंटों को भारी कमीशन का पता चला।

ED ने 30 जून 2026 को DMGPL से जुड़े आवासीय और कारोबारी परिसरों में तलाशी और सर्वे कर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।

इसका क्या मतलब है

अस्थायी कुर्की उन संपत्तियों पर अस्थायी रोक है जिन्हें ED कथित अपराध से जुड़ा बताती है; PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण से इसकी पुष्टि जरूरी है। अनधिकृत जमा योजनाओं की शिकायत RBI के सचेत पोर्टल https://sachet.rbi.org.in पर की जा सकती है। ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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