कार्रवाई
ब्रिटेन के बुज़ुर्गों को निशाना बनाने वाले कॉल सेंटर मामले में ED ने 3.72 करोड़ रुपये कुर्क किए
ED के अनुसार, उसने एक मामले में लगभग 3.72 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं, जिसमें उसका आरोप है कि भारतीय कॉल सेंटरों ने रिमोट एक्सेस ऐप के ज़रिए ब्रिटेन के बुज़ुर्गों से धोखाधड़ी की।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा है कि उसने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामले में लगभग 3.72 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। एजेंसी के अनुसार, इस मामले में भारत में चल रहे कॉल सेंटरों ने ब्रिटेन के बुज़ुर्ग लोगों को निशाना बनाया। ED के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद सब-ज़ोनल ऑफिस ने 22 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस कुर्की की जानकारी दी।
क्या हुआ
ED ने कहा कि उसका मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की FIR और चार्जशीट पर आधारित है। ED के अनुसार, आरोपी पहले M/s Glowbird Consultancy Private Limited, रांची और बाद में M/s Jubilate Info Private Limited, गोरखपुर के ज़रिए कॉल सेंटर चलाते थे, जहां कर्मचारियों को ब्रिटेन के निवासियों, ख़ासकर बुज़ुर्गों, को फ़र्ज़ी विदेशी नामों से और ब्रिटेन की एक इंटरनेट कंपनी का प्रतिनिधि बनकर कॉल करने का प्रशिक्षण दिया जाता था।
ED का आरोप है कि कॉल करने वाले इंटरनेट की रफ़्तार बढ़ाने के बहाने पीड़ितों से AnyDesk और Quick Assist जैसे रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवाते थे, जिससे उन्हें पीड़ितों के डिवाइस और बैंकिंग विवरण तक पहुंच मिल जाती थी। ED के अनुसार, फिर पीड़ितों को झूठा बताया जाता था कि उनके कनेक्शन पर साइबर हमला हुआ है और ब्रिटेन की धोखाधड़ी शिकायत संस्था में मामला दर्ज हुआ है, जिसके बाद उस संस्था के अधिकारी बनकर सुपरवाइज़र कथित तौर पर उनसे पैसे ट्रांसफ़र करवाते थे। ED का कहना है कि यह पैसा Western Union, MoneyGram और हवाला के ज़रिए भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड भेजा गया।
ED ने एक आरोपी और उसके एक सहयोगी से जुड़ी अपराध की कमाई लगभग 7 करोड़ रुपये आंकी है। कुर्क की गई संपत्तियों में कोलकाता का एक प्लॉट और एक फ्लैट, बैंक खातों में जमा राशि और बीमा पॉलिसियां शामिल हैं।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की से मामला चलने तक संपत्तियां बेची या हटाई नहीं जा सकतीं; इसकी पुष्टि PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को करनी होती है।
ED ने जो तरीका बताया है, यानी कोई कॉल करने वाला इंटरनेट ठीक करने का दावा करे और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने को कहे, वह बैंक खाते ख़ाली करने का एक आम रास्ता है। किसी अनजान कॉलर के कहने पर रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर कभी इंस्टॉल न करें और बैंकिंग विवरण या OTP कभी साझा न करें। अगर आपको निशाना बनाया गया है, तो https://cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या 1930 पर कॉल करें।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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