कार्रवाई
ED ने चेन्नई में 400 करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी धन शोधन नेटवर्क में दो को गिरफ्तार किया
ED ने कहा कि उसने 30 अक्टूबर 2026 को दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर उसका आरोप है कि उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम म्यूल बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी USDT के ज़रिये घुमाई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ED का आरोप है कि इस धोखाधड़ी की रकम म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी USDT के ज़रिये घुमाई गई। ED के चेन्नई ज़ोनल कार्यालय-II ने 30 अक्टूबर 2026 को ये गिरफ्तारियां कीं, एजेंसी ने 5 नवंबर 2026 की विज्ञप्ति में बताया।
क्या हुआ
ED ने कहा कि उसका मामला दो FIR पर आधारित है, एक तमिलनाडु पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर ने और दूसरी साइबराबाद, तेलंगाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने दर्ज की। एजेंसी के अनुसार, पीड़ितों से फोन या सोशल मीडिया पर निवेश योजनाओं, नौकरियों और शेयर बाज़ार में निवेश के बहाने संपर्क किया गया और उन्होंने म्यूल खातों में पैसे भेजे। ED का आरोप है कि फिर यह रकम छोटे हिस्सों में बांटकर दूसरे खातों में भेजी गई, कुछ नकद निकाली गई और कुछ क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में डाली गई।
ED ने कहा कि उसे तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में 10 और FIR तथा 600 से अधिक साइबर अपराध शिकायतें इसी नेटवर्क से जुड़ी मिलीं। उसका आरोप है कि इस नेटवर्क के ज़रिये 400 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय घुमाई गई।
ED के अनुसार, एक आरोपी नेटवर्क का मुख्य व्यक्ति था और अपने, अपनी पत्नी के और अपने नियंत्रण वाली संस्थाओं के नाम पर म्यूल खाते चलाता था; ऐसे 31 खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन मिले। एजेंसी का आरोप है कि दूसरा आरोपी अकाउंट किट, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल, सिम कार्ड, फोन और ई-मेल आईडी के साथ म्यूल खाते मुहैया कराता था।
ED ने कहा कि पहले की तलाशी में 14.50 लाख रुपये नकद और 3.26 करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी ज़ब्त की गई और बैंक खातों में लगभग 88.28 लाख रुपये फ्रीज़ किए गए। चेन्नई की विशेष PMLA अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
इसका क्या मतलब है
यह मामला दिखाता है कि फोन या सोशल मीडिया पर मिले निवेश, नौकरी और ट्रेडिंग के ऑफर से भेजा गया पैसा ED के अनुसार दूसरों के बैंक खातों से होकर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सकता है। ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार लोग https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर सकते हैं।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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