कार्रवाई
ED ने 28,000 करोड़ रुपये के साइबर ठगी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुंबई के व्यक्ति को एयरपोर्ट पर पकड़ा
ED के पणजी कार्यालय के अनुसार, उसने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ED का आरोप है कि उसने रिश्वत देकर साइबर ठगी नेटवर्क के करीब 100 फ्रीज़ बैंक खाते खुलवाए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पणजी ज़ोनल कार्यालय ने 26 अक्टूबर 2026 की अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उसने 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई के एक व्यक्ति को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED का आरोप है कि उसने नकद रिश्वत का इंतज़ाम करके एक साइबर ठगी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के करीब 100 फ्रीज़ बैंक खाते खुलवाए। ED के अनुसार इस नेटवर्क ने लगभग 28,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन किए।
क्या हुआ
ED के अनुसार, इस व्यक्ति को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बोर्डिंग गेट पर रोका गया, जब वह बिना वापसी टिकट के सुबह की उड़ान से दिल्ली जाने की कोशिश कर रहा था। इसमें मुंबई कस्टम्स और CISF ने मदद की। विशेष अदालत (PMLA), उत्तर गोवा ने उसे 29 अक्टूबर 2026 तक ED की हिरासत में भेजा है।
मामला गोवा पुलिस की एक FIR से शुरू हुआ, जो "डिजिटल अरेस्ट" से जुड़ी थी। ED का आरोप है कि TRAI और CBI के अधिकारी बनकर फ़ोन करने वालों ने गोवा की एक निवासी और उनके पति को वीडियो निगरानी में रखा, उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जाली आदेश दिखाया और करीब 2.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवाए।
ED का कहना है कि उसने यह पैसा 400 से ज़्यादा म्यूल खातों (दूसरों का पैसा आगे भेजने में इस्तेमाल होने वाले खाते) के रास्ते डमी डायरेक्टरों के ज़रिये चलाई जा रही कमोडिटी, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कंपनियों के नेटवर्क तक ट्रेस किया। ED के अनुसार, इस नेटवर्क ने करीब 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए, और इसके खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से ज़्यादा पीड़ितों की शिकायतों और 160 से ज़्यादा FIR में सामने आए हैं, जिनमें 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा के नुकसान की बात है।
ED का आरोप है कि जब भी साइबर ठगी की शिकायतों पर नेटवर्क के खाते फ्रीज़ होते, गिरफ्तार व्यक्ति अंगड़ियों (अनौपचारिक कूरियर) के ज़रिये नकद रिश्वत भेजकर उन्हें खुलवाता था, जिसमें एक बार 60 लाख रुपये से ज़्यादा का भुगतान भी शामिल है। ED के अनुसार इस मामले में यह सातवीं गिरफ्तारी है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
यह मामला दिखाता है कि ED के अनुसार फ्रीज़ किया गया ठगी का पैसा कथित तौर पर दोबारा कैसे चलन में लाया गया। कोई भी सरकारी अधिकारी या कॉल करने वाला किसी को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं कर सकता और न ही किसी तथाकथित निगरानी खाते में पैसा मांग सकता है। अगर आपको निशाना बनाया जाए या पैसा गंवाना पड़े, तो तुरंत https://cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या 1930 पर कॉल करें। ED का कहना है कि वह रिश्वत लेने वाले अधिकारियों की पहचान करने में जुटा है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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