कार्रवाई
अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर मामले में ED ने चार को गिरफ्तार किया
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद कार्यालय ने 3 नवंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिसके बारे में एजेंसी का कहना है कि इसमें एक फर्जी कॉल सेंटर ने अमेरिकी निवासियों से ठगी की।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चार लोगों को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया है, जिसमें एजेंसी के अनुसार एक फर्जी कॉल सेंटर ने अमेरिका के निवासियों से ठगी की। ED की 4 नवंबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, हैदराबाद कार्यालय ने 3 नवंबर 2026 को ये गिरफ्तारियां कीं और नामपल्ली, हैदराबाद की विशेष अदालत (PMLA) ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
क्या हुआ
ED ने कहा कि इसी मामले में जुलाई और अगस्त 2026 में तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिससे कुल गिरफ्तारियां सात हो गई हैं। एजेंसी के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार परिसरों पर तलाशी में तीन चालू कॉल सेंटर मिले, जहां करीब 220 लोग काम कर रहे थे।
ED के अनुसार, कॉल करने वाले अमेरिकी एजेंसियों, जैसे डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और फेडरल ट्रेड कमीशन, के अधिकारी बनकर फर्जी पहचान पत्र और अदालती दस्तावेज दिखाते थे, और पीड़ितों को, जिनमें कई बुजुर्ग थे, डराकर नकद और सोना सौंपने, मनी म्यूल खातों में पैसा भेजने और गिफ्ट कार्ड खरीदने को मजबूर करते थे। ED का आरोप है कि यह पैसा क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और दुबई व हांगकांग के खातों के जरिए भारत लाया गया।
ED ने कहा कि जब्त उपकरणों के व्हाट्सऐप ग्रुप में जुलाई 2025 से सितंबर 2026 के बीच लगभग US$ 27.39 मिलियन (करीब 261 करोड़ रुपये) की 927 स्वीकृत वसूलियों का रिकॉर्ड है। एजेंसी के अनुसार अब तक 549 अमेरिकी नागरिकों की पहचान पीड़ितों के रूप में हुई है और पैसा प्राप्त करने में इस्तेमाल 397 अमेरिकी बैंक खाते मिले हैं। एजेंसी का आरोप है कि गिरफ्तार लोगों में से एक पटियाला के कॉलिंग फ्लोर चलाता था, एक मुख्य हिसाब-किताब रखता था, एक नकदी उठाने का समन्वय करता था और एक, जो एक रेस्टोरेंट कारोबार में साझेदार है, को आय का हिस्सा मिला।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
यह मामला दिखाता है कि ऐसी ठगी कैसे होती है: कॉल करने वाला खुद को अधिकारी बताता है, कहता है कि आपका खाता किसी अपराध से जुड़ा है, और गोपनीयता रखने व बचत बचाने के नाम पर पैसा मांगता है। कोई असली एजेंसी फोन पर पैसा ट्रांसफर करने या गिफ्ट कार्ड खरीदने को नहीं कहती। ऐसी कॉल आने या पैसा गंवाने पर https://cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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