कार्रवाई
ED ने रामपुर के विश्वविद्यालय ट्रस्ट के संस्थापक को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया
ED ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के संस्थापक को PMLA के तहत गिरफ्तार किया है। ED का आरोप है कि सार्वजनिक कामों का पैसा रामपुर में ट्रस्ट के विश्वविद्यालय में लगाया गया।

फ़ोटो: Lupus in Saxonia / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 1 नवंबर 2026 को बताया कि उसके लखनऊ जोनल कार्यालय ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के संस्थापक, जो रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, को 31 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ED ने ट्रस्ट के पास मौजूद विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को भी 426.46 करोड़ रुपये की सीमा तक अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
क्या हुआ
ED के मुताबिक उसकी जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जुलाई 2019 में रामपुर के अजीम नगर थाने में IPC की धारा 323, 342, 384, 447, 504 और 506 के तहत दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू हुई। ED के अनुसार, इन FIR में आरोप है कि रामपुर के सिंगनखेड़ा गांव के किसानों की खेती की जमीन विश्वविद्यालय के लिए जबरन कब्जा की गई, और मारपीट, गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने और धमकियों के जरिए किसानों से उसके पक्ष में बैनामे करवाए गए।
ED का आरोप है कि उसकी जांच में पाया गया कि सार्वजनिक कामों के लिए रखा गया पैसा और सामग्री विश्वविद्यालय में लगाई गई, सरकारी काम उसके निजी परिसर में कराए गए, और सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों का पैसा दान के रूप में ट्रस्ट को वापस भेजा गया। एजेंसी के अनुसार, ED की सूचना पर 13 अक्टूबर 2026 को BNS, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एक नई FIR दर्ज हुई, और रामपुर में लूट, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और जालसाजी की 28 अन्य FIR भी जांच में ली गईं।
अस्थायी कुर्की 28 अक्टूबर 2026 को की गई। ED ने कहा कि कुर्क संपत्ति का मौजूदा मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। ED ने अगस्त 2026 में रामपुर में विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों की तलाशी लेकर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।
इसका क्या मतलब है
अस्थायी कुर्की का मतलब है उस संपत्ति पर अस्थायी रोक, जिसे ED कथित अपराध से जुड़ा बताती है। इसके अंतिम होने से पहले PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) से इसकी पुष्टि जरूरी है। ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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