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दिल्ली हाई कोर्ट ने Godrej Properties के खिलाफ ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस रद्द किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को Godrej Properties के खिलाफ ED का PMLA केस रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस पुलिस FIR पर यह केस टिका था, उसके रद्द होने के बाद यह नहीं चल सकता।

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आधिकारिक स्रोतDelhi High Court
A law library aisle between tall shelves of bound volumes

फ़ोटो: MaxnaCarta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा Godrej Properties Ltd के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ED का केस आगे नहीं चल सकता, क्योंकि जिस पुलिस केस पर यह आधारित था, वह पहले ही रद्द हो चुका है। फैसले के अनुसार, ED ने इस बात पर आपत्ति नहीं की कि पुलिस केस रद्द हो चुका है।

क्या हुआ

ED ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत DLZO-II/9/2024 नंबर की Enforcement Case Information Report यानी ECIR (ED की FIR जैसी रिपोर्ट) दर्ज की थी। फैसले के अनुसार, यह केवल 29 मई 2024 की उस FIR पर आधारित थी, जो दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने Orris Infrastructure Private Limited की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 और 120-B के तहत दर्ज की थी।

कंपनी ने कोर्ट को बताया कि Orris के साथ विवाद दीवानी और व्यावसायिक था और दोनों पक्षों ने इसे पूरी तरह सुलझा लिया है। Orris के यह कहने पर कि वह मामला आगे नहीं बढ़ाना चाहती, हाई कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को ही शिकायत केस और FIR रद्द कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के Vijay Madanlal Choudhary फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जब मूल अपराध, जिसे शेड्यूल्ड ऑफेंस कहते हैं, रद्द हो जाए, तो उससे जुड़ी संपत्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई नहीं हो सकती। कोर्ट के अनुसार, न तो कोई शेड्यूल्ड ऑफेंस बचा और न ही अपराध की कोई आय, इसलिए ED केस का आधार खत्म हो गया। कोर्ट ने ECIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाही रद्द कर दी।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला एक स्थापित सिद्धांत लागू करता है: PMLA केस किसी मौजूद मूल अपराध पर टिका होता है। जब वह अपराध रद्द हो जाए, आरोपी डिस्चार्ज हो या बरी हो जाए, तो ED का केस भी खत्म हो जाता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में कोई पक्ष FIR की कार्यवाही फिर से शुरू करता है, तो ED अपना केस भी दोबारा शुरू कर सकेगा। मूल शिकायत के आरोपों की कभी सुनवाई में जांच नहीं हुई और वे दोष का निष्कर्ष नहीं थे; कंपनी को निर्दोष माना जाता है, और कोर्ट के आदेश के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया तभी होगी जब FIR फिर से शुरू हो।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।