कानूनी
दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने Union Bank को लॉकर के गहनों के लिए 47 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक संयुक्त लॉकर मामले में Union Bank of India को सेवा में कमी का दोषी माना और गायब गहनों के लिए ब्याज सहित 47 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया।
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को Union Bank of India को एक ग्राहक को संयुक्त लॉकर में रखे गहनों की कीमत, 47 लाख रुपये, ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया। आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी माना, क्योंकि बैंक ने लॉकर को सरेंडर किया हुआ माना लेकिन सरेंडर का कोई सबूत पेश नहीं कर सका।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, ग्राहक 1998 से अपने ससुर के साथ बैंक की नई दिल्ली स्थित नारायणा विहार शाखा में संयुक्त लॉकर रखती थीं। ससुर का 29 अगस्त 2010 को निधन हो गया। 1 सितंबर 2018 को जब वह लॉकर खोलने शाखा पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि लॉकर 22 जनवरी 2015 को सरेंडर हो चुका है। बैंक ने अपने जवाब में कहा कि लॉकर 21 मई 2005 को सरेंडर हुआ था और जो किराया वह काटता रहा, वह सद्भाव में हुई गलती थी।
आयोग ने खाते के स्टेटमेंट से पाया कि लॉकर का किराया काटा जाता रहा, जिसमें 25 सितंबर 2018 की कटौती भी शामिल है। आयोग ने पाया कि बैंक ने न तो सरेंडर की कोई रसीद पेश की, न ग्राहक की ओर से सरेंडर का कोई अनुरोध, और न ही लॉकर के सामान की कोई रसीद। इसी आधार पर आयोग ने माना कि ग्राहक ने कभी लॉकर सरेंडर नहीं किया था और उनके सामान का बैंक द्वारा दुरुपयोग किया गया। आयोग ने क्षेत्राधिकार पर बैंक की आपत्तियां भी खारिज कर दीं।
अगर बैंक 27 दिसंबर 2026 तक भुगतान कर देता है, तो उसे 47 लाख रुपये पर 1 सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक 6% सालाना साधारण ब्याज देना होगा। यह तारीख चूकने पर ब्याज 1 सितंबर 2018 से भुगतान तक 9% सालाना होगा। बैंक को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 3 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 50,000 रुपये भी देने होंगे।
इसका क्या मतलब है
यह आदेश दिखाता है कि जो बैंक कहता है कि लॉकर सरेंडर हो चुका है, उसे इसके कागजात पेश करने होंगे, और किराया वसूलते रहना उसके खिलाफ जाता है। लॉकर धारक अपने किराए की रसीदें और खाते के स्टेटमेंट संभालकर रख सकते हैं।
यह आदेश राज्य आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। लॉकर या बैंक सेवा से जुड़ी शिकायत वाले ग्राहक https://cms.rbi.org.in पर RBI से या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।