कानूनी
दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने Oriental Insurance को हार्ट सर्जरी का क्लेम चुकाने का आदेश बरकरार रखा
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Oriental Insurance की अपील खारिज कर दी और खारिज किए गए स्वास्थ्य क्लेम पर 6% ब्याज के साथ 2,70,409 रुपये चुकाने का आदेश बरकरार रखा।
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 28 अक्टूबर 2026 को Oriental Insurance Company की अपील खारिज कर दी और एक पॉलिसीधारक के खारिज किए गए हार्ट सर्जरी क्लेम का भुगतान करने का आदेश बरकरार रखा। बीमा कंपनी को शिकायत दायर करने की तारीख से 6% सालाना ब्याज के साथ 2,70,409 रुपये चुकाने होंगे, साथ ही मुकदमे के खर्च सहित 25,000 रुपये मुआवजा देना होगा।
क्या हुआ
पॉलिसीधारक के पास 5 दिसंबर 2013 से 4 दिसंबर 2014 तक की Oriental Insurance की Health Shield पॉलिसी थी, जिसकी बीमा राशि 5,00,000 रुपये और प्रीमियम 9,600 रुपये था। 30 जनवरी 2014 को उन्हें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम के साथ भर्ती कराया गया, बाद में दूसरे अस्पताल में उनकी बायपास सर्जरी हुई और 13 फरवरी 2014 को छुट्टी मिली।
बीमा कंपनी ने पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े अपवाद क्लॉज 4.1 का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया, क्योंकि अस्पताल के रिकॉर्ड में 10 साल से डायबिटीज और तीन साल से स्ट्रोक के इतिहास का जिक्र था। पूर्वी दिल्ली के जिला फोरम ने 31 मार्च 2017 को पॉलिसीधारक के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ बीमा कंपनी ने अपील की।
राज्य आयोग ने कहा कि पहले से मौजूद बीमारी छिपाने की बात साबित करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की है। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी यह नहीं दिखा सकी कि पॉलिसीधारक पहले डायबिटीज या स्ट्रोक के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। आयोग ने यह भी कहा कि पॉलिसी शेड्यूल में सिर्फ वेबसाइट का जिक्र कर देने से यह साबित नहीं होता कि पूरी शर्तें बीमित व्यक्ति को दी गई थीं। आयोग के मुताबिक, कोई बीमा कंपनी सिर्फ अपवाद क्लॉज की ओर इशारा करके क्लेम खारिज करने को सही नहीं ठहरा सकती, जब तक वह यह साबित न करे कि क्लॉज लागू होता है।
इसका क्या मतलब है
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों के लिए यह आदेश दोहराता है कि अस्पताल के कागजों में डायबिटीज जैसी आम बीमारियों का इतिहास दर्ज होना, अपने आप में, क्लेम खारिज करने के लिए काफी नहीं है; बीमा कंपनी को साबित करना होगा कि क्लॉज लागू होता है। यह भी संकेत है कि बीमा कंपनियों को दिखाना होगा कि पॉलिसी की शर्तें वास्तव में ग्राहक तक पहुंचीं।
यह आदेश राज्य आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। जिन पॉलिसीधारकों के स्वास्थ्य क्लेम खारिज हुए हैं, वे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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