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दिल्ली उपभोक्ता आयोग: National Insurance कोविड क्लेम में काटे 1.1 लाख रुपये चुकाए

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि National Insurance ने एक पॉलिसीधारक के कोविड-19 अस्पताल क्लेम से 1.1 लाख रुपये गलत तरीके से काटे, और बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 30 अक्टूबर 2026

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना है कि National Insurance Company ने एक पॉलिसीधारक के कोविड-19 अस्पताल क्लेम से 1.1 लाख रुपये गलत तरीके से काटे। 28 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में आयोग ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग का वह आदेश बरकरार रखा जिसमें बकाया रकम ब्याज समेत चुकाने को कहा गया था।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, पॉलिसीधारक सुपर टॉप-अप के साथ एक ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी में कवर थे। उन्हें गंभीर कोविड-19 के चलते 4 नवंबर से 20 नवंबर 2020 तक गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा: 12 दिन ICU में और चार दिन आइसोलेशन वार्ड में। अस्पताल ने ICU पैकेज के लिए रोज 15,000 रुपये और आइसोलेशन पैकेज के लिए रोज 10,000 रुपये लिए।

पॉलिसीधारक ने 4,79,270 रुपये का क्लेम किया। बीमा कंपनी ने 3,64,368 रुपये दिए और 1.1 लाख रुपये यह कहकर नामंजूर कर दिए कि पॉलिसी में कमरे का किराया रोज 5,000 रुपये और ICU शुल्क रोज 7,500 रुपये तक सीमित है।

आयोग ने पाया कि अस्पताल के ब्योरे के मुताबिक पैकेज में सिर्फ बिस्तर नहीं, बल्कि कंसल्टेंट विजिट, नर्सिंग शुल्क और PPE किट जैसे दूसरे चिकित्सा खर्च भी शामिल थे। आयोग ने कहा कि कमरे के किराये और ICU की सीमाएं सिर्फ उन्हीं मदों पर लागू होती हैं, और पॉलिसी में कवर दूसरे चिकित्सा खर्च केवल इसलिए नहीं काटे जा सकते कि अस्पताल ने उन्हें पैकेज में जोड़कर बिल किया।

आयोग ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (नॉर्थ ईस्ट), दिल्ली का 2 जुलाई 2025 का आदेश बरकरार रखा। उस आदेश के तहत बीमा कंपनी को 1.1 लाख रुपये शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ, और 45,000 रुपये मुआवजा व मुकदमे का खर्च उस आदेश की तारीख से 9% ब्याज के साथ चुकाने हैं। आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है।

इसका क्या मतलब है

पॉलिसीधारकों के लिए यह फैसला बताता है कि हेल्थ पॉलिसी में कमरे के किराये या ICU की सीमा के आधार पर बीमा कंपनी अस्पताल के पैकेज रेट और उस सीमा के पूरे अंतर को अतिरिक्त किराया नहीं मान सकती। पॉलिसी में कवर चिकित्सा खर्च चुकाने होंगे, भले ही अस्पताल उन्हें एक दैनिक पैकेज में जोड़ दे।

जिन पॉलिसीधारकों का क्लेम इस तरह काटा गया है, वे अस्पताल से पैकेज का मदवार ब्योरा मांग सकते हैं। बीमा कंपनी से विवाद न सुलझने पर वे नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil के जरिए ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।