कानूनी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य संचालनालय के लिपिक प्रकाश जायसवाल को ACB रिश्वत मामले में बरी किया
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ACB ट्रैप मामले में स्वास्थ्य संचालनालय के एक लिपिक की 2016 की सजा रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन रिश्वत की मांग साबित नहीं कर सका।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य सेवा संचालनालय, छत्तीसगढ़, रायपुर में तत्कालीन सहायक ग्रेड-II प्रकाश जायसवाल को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर के 2009 के रिश्वत ट्रैप मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने उनकी सजा रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि उन्होंने रिश्वत मांगी थी।
क्या हुआ
रायपुर की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने 18 अक्टूबर 2016 को लिपिक को अधिनियम की धारा 7 और 13(1)(d) सहपठित 13(2) के तहत दोषी ठहराया था और एक साल के सश्रम कारावास व 5,000 रुपये जुर्माने की सजा दी थी।
फैसले में दर्ज अभियोजन पक्ष के अनुसार, लिपिक ने एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के अवकाश निपटारे के लिए पैसे मांगे थे, और 4 अगस्त 2009 को ACB की ट्रैप टीम ने उनसे 5,000 रुपये के चिह्नित नोट बरामद किए। लिपिक ने किसी भी मांग से इनकार किया और कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया।
हाई कोर्ट ने पाया कि ट्रैप से पहले शिकायत का सत्यापन नहीं हुआ, अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि टेप रिकॉर्डिंग में आवाज लिपिक की थी, और शिकायतकर्ता ने कहा कि वह लेन-देन से पहले लिपिक से नहीं मिला था। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि मांग के सबूत के बिना केवल पैसे स्वीकार करना और बरामदगी सजा के लिए काफी नहीं है। संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने अपील मंजूर कर ली। उनका जमानत बॉन्ड BNSS, 2023 की धारा 481 के तहत छह महीने तक लागू रहेगा।
आरोप ऐसे आरोप थे जिन्हें अब कोर्ट ने साबित नहीं माना है; कोई भी आरोपी तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक अदालत में दोष साबित न हो, और कानूनी प्रक्रिया जारी रहती है।
इसका क्या मतलब है
यह फैसला एक स्थापित नियम को दोहराता है: रिश्वत के मामले में अभियोजन को यह साबित करना होगा कि लोक सेवक ने पैसे मांगे थे, सिर्फ यह नहीं कि उनके पास चिह्नित नोट मिले। जांच एजेंसियों के लिए यह ट्रैप से पहले शिकायत के सत्यापन और रिकॉर्डिंग को ठीक से साबित करने की जरूरत पर जोर देता है।
अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगे तो नागरिक अपने राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो से शिकायत कर सकते हैं; हर राज्य की हेल्पलाइन के लिए Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर है।
स्रोत: High Court judgment
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