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कानूनी

चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने दुबई बाढ़ मामले में Emirates के खिलाफ आदेश बरकरार रखा

चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने Emirates की अपील खारिज कर दी और अप्रैल 2024 की दुबई बाढ़ के दौरान विमान में चढ़ने से रोके गए यात्री को भुगतान का आदेश बरकरार रखा।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 1 नवंबर 2026

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वह आदेश बरकरार रखा है, जिसमें Emirates और ट्रैवल बुकिंग कंपनी Yatra Online को एक यात्री को 1,88,521.87 रुपये चुकाने को कहा गया था। अप्रैल 2024 में दुबई की बाढ़ के दौरान यात्री और उनकी पत्नी को विमान में चढ़ने नहीं दिया गया था। आयोग ने 28 अक्टूबर 2026 को एयरलाइन की अपील खारिज कर दी।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, यात्री ने 19 अप्रैल 2024 को नई दिल्ली से दुबई होकर मिलान जाने के लिए Yatra Online के ज़रिए Emirates के टिकट बुक किए थे और 1,45,384.99 रुपये चुकाए थे। उस दिन हवाई अड्डे पर दुबई में मौसम की गड़बड़ी के कारण दंपती को विमान में चढ़ने नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने आखिरी समय में Saudia Airlines के टिकट 2,13,103.87 रुपये में खरीदे।

4 मई 2026 को चंडीगढ़ के ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने एयरलाइन और Yatra Online को संयुक्त रूप से और अलग-अलग 1,88,521.87 रुपये चुकाने का आदेश दिया था। यह 24,582 रुपये का रिफंड घटाने के बाद का अतिरिक्त खर्च है। साथ में शिकायत की तारीख से 9% सालाना साधारण ब्याज और मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न व मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये देने को कहा गया। आदेश मिलने के 45 दिन में भुगतान न होने पर मूल रकम पर 12% सालाना दंडात्मक ब्याज लगेगा।

Emirates ने दलील दी कि बाढ़ उसके नियंत्रण से बाहर थी और उसने सोशल मीडिया व अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक सूचना दी थी। राज्य आयोग ने कहा कि खराब मौसम से उड़ानों में गड़बड़ी समझ में आती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि यात्री को समय पर बताया गया या दूसरी उड़ान दी गई। आयोग ने नोट किया कि एयरलाइन के अपने बयान के अनुसार बाढ़ 14 अप्रैल 2024 को शुरू हुई थी, जबकि यात्री को गड़बड़ी का पता 19 अप्रैल को हवाई अड्डे पर ही चला। आयोग ने कहा कि आम सार्वजनिक सूचनाओं से यह साबित नहीं होता कि इस यात्री को जानकारी दी गई थी। उसने ज़िला आयोग का आदेश पूरी तरह बरकरार रखा।

इसका क्या मतलब है

इस फैसले के अनुसार, खराब मौसम का हवाला देने वाली एयरलाइन को यह भी दिखाना होगा कि उसने हर प्रभावित यात्री को समय पर बताया और यात्रा का दूसरा रास्ता दिया। आखिरी समय में विमान में चढ़ने से रोके जाने के बाद दूसरी उड़ान के लिए अतिरिक्त पैसे चुकाने वाले यात्री उपभोक्ता आयोग में इसका दावा कर सकते हैं। शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil पर की जा सकती है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।