कानूनी
चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने आदित्य बिड़ला हेल्थ के खिलाफ 5.19 लाख रुपये का क्लेम बरकरार रखा
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस की अपील खारिज कर दी और 2012 की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर रद्द पॉलिसी बहाल करने व 5.19 लाख रुपये चुकाने का आदेश बरकरार रखा।

फ़ोटो: Dominic / Wikimedia Commons, CC0 1.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, यू.टी. चंडीगढ़ ने 27 अक्टूबर 2026 को आदित्य बिड़ला कैपिटल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी और एक पॉलिसीधारक को कैंसर के इलाज के लिए 5,18,589 रुपये देने का आदेश बरकरार रखा। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने 2012 की एक मेडिकल घटना के आधार पर क्लेम गलत तरीके से ठुकराया और पॉलिसी रद्द की।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, पॉलिसीधारक 1 अप्रैल 2021 से 20 लाख रुपये की बीमा राशि के साथ इस कंपनी से बीमित था। 2023 में उसने PGIMER, चंडीगढ़ में सर्जरी पर 1,61,454 रुपये और मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मोहाली में आगे के इलाज पर 3,57,135 रुपये खर्च किए। बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम ठुकरा दिया कि उसने 2012 से चले आ रहे दौरों और दिमाग की एक गांठ की जानकारी नहीं दी थी, और बाद में पॉलिसी रद्द कर दी।
आयोग ने कहा कि पॉलिसी खुद पहले से मौजूद बीमारी को ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित करती है जिसका पता या इलाज पॉलिसी शुरू होने से 48 महीने के भीतर हुआ हो। 2012 की घटना आठ साल से भी पहले की थी। आयोग ने इलाज करने वाले डॉक्टर के प्रमाणपत्र पर भरोसा किया कि यह कहने का कोई ठोस आधार नहीं है कि 2023 का ट्यूमर 2012 से मौजूद था, और कहा कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि कोई अहम तथ्य जानबूझकर छिपाया गया। आयोग ने कहा कि परम सद्भाव के सिद्धांत का इस्तेमाल पॉलिसी की अपनी परिभाषा को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता।
आयोग ने 1 अप्रैल 2026 के जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा: शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9% साधारण ब्याज के साथ 5,18,589 रुपये, 20,000 रुपये मुआवजा, 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च, और बकाया प्रीमियम मिलने पर उन्हीं शर्तों पर पॉलिसी की बहाली। उस आदेश में पालन के लिए 45 दिन दिए गए थे, जिसके बाद ब्याज 12% हो जाता है।
इसका क्या मतलब है
आदेश कहता है कि जानकारी छिपाने का आरोप लगाने वाली बीमा कंपनी को दिखाना होगा कि बीमारी पॉलिसी की अपनी परिभाषा में आती है और उसे जानबूझकर छिपाया गया, और इस आधार पर लंबे समय से चल रही पॉलिसी रद्द करने का फैसला पलटा जा सकता है। जिन पॉलिसीधारकों के क्लेम ठुकराए गए हैं, वे अपनी पॉलिसी की परिभाषाएं जांच सकते हैं। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। शिकायत e-Daakhil या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 के जरिए की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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