कानूनी
चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने ICICI बैंक का 11.75% ब्याज सहित रिफंड आदेश बरकरार रखा, रोजाना जुर्माना हटाया
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने ICICI बैंक की पुनर्विचार अर्जी आंशिक रूप से मानी; 10,000 रुपये रोजाना का जुर्माना हटाया, लेकिन 11.75% ब्याज के साथ 89 लाख और 80 लाख रुपये लौटाने का आदेश बरकरार रखा।

फ़ोटो: Steven Bornholtz / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, यू.टी. चंडीगढ़ ने 27 अक्टूबर 2026 को ICICI बैंक की पुनर्विचार अर्जी आंशिक रूप से स्वीकार की, लेकिन यह निर्देश कायम रखा कि बैंक दो खातों से 89 लाख रुपये और 80 लाख रुपये ग्राहकों के एक समूह को 11.75% सालाना ब्याज के साथ लौटाए। आयोग ने रोजाना का जुर्माना और टाइटल डीड से जुड़ा निर्देश हटा दिया।
क्या हुआ
यह पुनर्विचार अर्जी आयोग के ही 21 मई 2026 के आदेश के खिलाफ थी, जो एक एग्जीक्यूशन अपील में दिया गया था, यानी उपभोक्ता फोरम के पहले के आदेश को लागू कराने की कार्यवाही। मई के आदेश में ICICI बैंक को दोनों रकमें खाते बंद होने की तारीख, 1 अप्रैल 2015 और 1 सितंबर 2015 से 11.75% ब्याज के साथ लौटाने, गिरवी संपत्तियों की मूल टाइटल डीड लौटाने, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देने, और 30 दिन में पालन न होने पर हर खाते के लिए 5,000 रुपये रोजाना देने का निर्देश दिया गया था।
पुनर्विचार आदेश के अनुसार, बैंक ने दलील दी कि 2012 के मूल आदेश में कोई ब्याज नहीं दिया गया था और एग्जीक्यूशन फोरम उस आदेश से आगे राहत नहीं दे सकता। आयोग ने कहा कि ये सवाल मई के आदेश में ही तय हो चुके हैं और रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट गलती नहीं दिखती; बैंक चाहे तो कानून के तहत रिवीजन दाखिल कर सकता है।
आयोग ने बैंक की दो बातें मानीं। ग्राहकों ने 25 सितंबर 2026 को कहा था कि उन्हें टाइटल डीड करीब दो साल पहले मिल चुकी हैं, इसलिए वह निर्देश हटा दिया गया। और चूंकि ग्राहकों को पहले से 11.75% ब्याज मिल रहा है, आयोग ने रोजाना जुर्माने को ज्यादा माना और हटा दिया, साथ ही कहा कि इससे बैंक रिफंड की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होता।
बैंक को अब आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिन के भीतर दोनों रकमें ब्याज सहित चुकानी होंगी।
इसका क्या मतलब है
आदेश दिखाता है कि अपने फैसले को लागू कराते समय उपभोक्ता फोरम बैंक को रोकी गई रकम पर ब्याज देने का निर्देश दे सकता है, जबकि ब्याज के ऊपर रोजाना जुर्माना पुनर्विचार में घटाया जा सकता है। बैंक इस आदेश को रिवीजन के जरिए आगे चुनौती दे सकता है। बैंक से अनसुलझे विवाद वाले ग्राहक RBI से https://cms.rbi.org.in पर या e-Daakhil के जरिए शिकायत कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।