कार्रवाई
PNB के 4 करोड़ रुपये के कर्ज़ मामले में CBI अदालत ने फर्म प्रोप्राइटर को सात साल की सज़ा दी
CBI के अनुसार, नई दिल्ली की CBI अदालत ने PNB से जुड़े 4 करोड़ रुपये के कर्ज़ मामले में दोष स्वीकार करने वाले एक फर्म प्रोप्राइटर को सात साल के सश्रम कारावास और 1.6 लाख रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है।
नई दिल्ली के राउज़ एवेन्यू ज़िला न्यायालय स्थित विशेष CBI अदालत ने बैंक कर्ज़ के एक मामले में एक फर्म के प्रोप्राइटर को सात साल के सश्रम कारावास और 1.6 लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, आरोपी के अपना दोष स्वीकार करने के बाद अदालत ने 24 अक्टूबर 2026 को उसे दोषी ठहराया। मामला पंजाब नेशनल बैंक की नई दिल्ली स्थित जोर बाग शाखा से ली गई 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा से जुड़ा है।
क्या हुआ
CBI ने बताया कि उसने 11 जुलाई 2013 को दो फर्मों, M/s Shankar Metals और M/s Super Machines, के प्रोप्राइटरों, एक अन्य आरोपी और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। CBI के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक साज़िश के तहत फर्ज़ी और जाली संपत्ति दस्तावेज़ों के आधार पर बैंक से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की और कर्ज़ की रकम को उन कामों के बजाय दूसरे कामों में लगाया, जिनके लिए वह मंज़ूर हुई थी।
CBI के मुताबिक, 2016 में दोषी ठहराया गया आरोपी एक अन्य मामले में सोनीपत की अदालत में पेशी के दौरान न्यायिक हिरासत से भाग गया था। निचली अदालत ने 23 नवंबर 2017 को उसे भगोड़ा अपराधी (proclaimed offender) घोषित किया, यानी ऐसा व्यक्ति जो अदालत के आदेश के बावजूद गिरफ्तारी से बचता है।
CBI के अनुसार, जनवरी 2026 में उसे सूचना मिली कि वह झूठी पहचान के साथ वडोदरा में रह रहा है। एजेंसी ने उसे बांसवाड़ा के उमराई में एक मंदिर में खोज निकाला और 30 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया।
CBI ने बताया कि मुकदमे के दौरान उसने आपराधिक साज़िश, प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाज़ी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाज़ी और जाली दस्तावेज़ों को असली के रूप में इस्तेमाल करने के अपराध स्वीकार किए। इसके बाद अदालत ने उसे दोषी ठहराकर सज़ा सुनाई।
इसका क्या मतलब है
यह मामला दिखाता है कि बैंक कर्ज़ से जुड़े मामलों में दर्ज होने के कई साल बाद भी फैसला आ सकता है, भले ही कोई आरोपी हिरासत से भाग जाए। कैश क्रेडिट सुविधा एक कार्यशील पूंजी कर्ज़ है, जिसमें कोई कारोबार तय सीमा तक पैसा निकाल सकता है। CBI की विज्ञप्ति में अन्य आरोपियों के मामले के नतीजे की जानकारी नहीं दी गई है।
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स्रोत: CBI press release
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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