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मंत्रिमंडल ने देश में कंटेनर बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी

PIB के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दी, जो देश की कंटेनर निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना है।

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आधिकारिक स्रोतPress Information Bureau, Government of India
White container cranes along a quay

फ़ोटो: Geni / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दी। 10,000 करोड़ रुपये की इस योजना का उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण उद्योग तैयार करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित यह योजना 2027-28 से 2039-40 तक चलेगी।

क्या हुआ

विज्ञप्ति के अनुसार, योजना नए कारखानों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार, दोनों को सहायता देगी। इसका लक्ष्य देश की सालाना कंटेनर निर्माण क्षमता को लगभग 70,000 TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवैलेंट यूनिट, कंटेनर का मानक आकार) से बढ़ाकर 7.5 लाख TEU करना है, यानी लगभग दस गुना बढ़ोतरी। कंपनियों को संयंत्र लगाने के लिए तीन साल और उत्पादन सहायता के लिए दस साल मिलेंगे।

विज्ञप्ति में बताई गई सहायता:

  • ब्याज सब्सिडी (859 करोड़ रुपये): पात्र सावधि ऋणों पर 3% सालाना, कम से कम 1,00,000 TEU सालाना क्षमता वाले नए संयंत्रों और कम से कम 25,000 TEU के विस्तार के लिए।
  • परिचालन सहायता (8,891 करोड़ रुपये): वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप बने और पात्र निर्माता द्वारा बेचे गए हर कंटेनर पर भुगतान, ताकि आयातित कंटेनरों से लागत का अंतर घटे। घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी 70% से बढ़ाकर 90% करनी होगी।
  • परीक्षण और प्रमाणन (150 करोड़ रुपये): साझा परीक्षण सुविधाएं, ताकि विदेश में परीक्षण पर निर्भरता घटे।
  • योजना प्रबंधन (100 करोड़ रुपये): प्रशासन और निगरानी।
  • बंदरगाह की जमीन: प्रमुख बंदरगाहों पर अधिसूचित दर के 25% पर पट्टा।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति बनाई जाएगी, जो दिशा-निर्देश मंजूर करेगी और सहायता स्वीकृत करेगी।

इसका क्या मतलब है

विज्ञप्ति के अनुसार, भारत के व्यापार में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी कंटेनर विदेश में बनते हैं, जबकि कंटेनर यातायात 2024 के लगभग 2.4 करोड़ TEU से बढ़कर 2047 तक 17.5 करोड़ TEU होने का अनुमान है। सरकार को उम्मीद है कि योजना से इस्पात, पुर्जों और लॉजिस्टिक्स में लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार बनेंगे और 2039-40 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये का आर्थिक उत्पादन होगा, जो दी जाने वाली सहायता के सात गुने से अधिक है।

विज्ञप्ति के अनुसार, योजना कॉर्नर कास्टिंग, विशेष प्रकार के इस्पात, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा देगी। विज्ञप्ति के अनुसार, संचालन समिति का गठन किया जाना है और वही योजना के दिशा-निर्देश मंजूर करेगी।

स्रोत: PIB release: Cabinet approves container scheme

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।