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बॉम्बे हाई कोर्ट ने 7,569 करोड़ रुपये के कथित रेमिटेंस मामले में ED की गिरफ्तारी अवैध ठहराई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ED की गिरफ्तारी को अवैध ठहराकर आरोपी की रिहाई का आदेश दिया; अभियोजन का आरोप है कि म्यूल खातों से 7,569 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए।

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आधिकारिक स्रोतBombay High Court
कानूनी / 30 अक्टूबर 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में एक आरोपी की Enforcement Directorate (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया। अभियोजन का आरोप है कि इस मामले में म्यूल बैंक खातों के जरिए 7,569 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए। कोर्ट ने मुंबई की विशेष PMLA अदालत के तीन रिमांड आदेश रद्द कर दिए, आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और अपने आदेश पर दो हफ्ते की रोक लगाने की ED की मांग ठुकरा दी।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, ठाणे पुलिस ने 6 अक्टूबर 2023 को भारतीय दंड संहिता और Information Technology Act के धोखाधड़ी और जालसाजी संबंधी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था। ED ने 26 दिसंबर 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया, जिसमें अपराध से अर्जित राशि 1,618 करोड़ रुपये बताई गई। एक पूरक आरोपपत्र में आरोप है कि आरोपी और अन्य लोगों ने 97 साझेदारी फर्में और 18 प्राइवेट कंपनियां ऐसे लोगों के नाम पर बनाईं, जिनके KYC दस्तावेज कर्ज या नौकरी दिलाने के बहाने लिए गए थे, और 269 म्यूल बैंक खाते खोले। आरोपपत्र में यह भी आरोप है कि कम कीमत दिखाए गए आयात पर कस्टम ड्यूटी बचाने के लिए जाली इनवॉइस और बिल ऑफ लैडिंग के सहारे 7,569 करोड़ रुपये विदेश भेजे गए।

आरोपी को पहली बार मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था और जून 2024 में जमानत मिली थी; ED ने 23 जून 2026 को उसे फिर गिरफ्तार किया। कोर्ट ने पाया कि वह 18 महीनों में 38 बार बयान दे चुका था और सहयोग कर रहा था। कोर्ट ने कहा कि ED पहले ही अपने पास मौजूद सामग्री से उसका सामना कराने के लिए विशेष अदालत की अनुमति ले चुका था, इसलिए नए सबूत या किसी नई आकस्मिक परिस्थिति के बिना उसी सामग्री के आधार पर PMLA की धारा 19 के तहत उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता था, और ऐसा कुछ सामने नहीं आया था।

इसका क्या मतलब है

फैसले के अनुसार ED की गिरफ्तारी दर्ज कारणों और ऐसी सामग्री पर आधारित होनी चाहिए जो उसकी जरूरत दिखाए, और अदालतें जांच सकती हैं कि ये सुरक्षा उपाय पूरे हुए या नहीं। इससे मामला खत्म नहीं होता। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

आरोपों से यह भी पता चलता है कि कर्ज या नौकरी के वादे पर सौंपे गए KYC दस्तावेजों से किसी के नाम पर खाते खोले जा सकते हैं। जिसे अपनी पहचान के दुरुपयोग का संदेह हो, वह https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर सकता है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।