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कानूनी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ESIC की मांग और बैंक खाते की कुर्की रद्द की

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बंद हो चुके कारोबार से 5.84 लाख रुपये की ESIC मांग और उसके पूर्व मालिक के बैंक खाते की कुर्की को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि न नोटिस पहुंचा न गणना का आधार था।

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आधिकारिक स्रोतAndhra Pradesh High Court
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2026 को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें विशाखापत्तनम के एक छोटे कारोबार से 5,84,430 रुपये के अंशदान की मांग की गई थी। कोर्ट ने उसके बाद के उस आदेश को भी रद्द किया, जिसके तहत कारोबार के पूर्व मालिक का बैंक खाता 9,19,741 रुपये के लिए कुर्क किया गया था। कोर्ट ने कहा कि मांग बिना किसी सामग्री के और याचिकाकर्ता तक नोटिस पहुंचे बिना तय की गई थी।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, ESIC ने 13 नवंबर 2024 को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की Section 45A के तहत अक्टूबर 2019 से अप्रैल 2024 की अवधि के लिए देय अंशदान तय किया। 18 सितंबर 2026 को उसके वसूली अधिकारी ने The Federal Bank में याचिकाकर्ता के खाते को वसूली खर्च और ब्याज सहित 9,19,741 रुपये के लिए कुर्क करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कारोबार बंद हो चुका है, वह अब वेतनभोगी कर्मचारी है, और बैंक खाते में आने वाला वेतन वसूली में ले रहा था।

ESIC के वकील ने कहा कि नियोक्ता के पते पर नोटिस भेजे गए थे, नियोक्ता 9 जुलाई 2024 की सुनवाई में नहीं आया और कोई रिकॉर्ड या विवरण नहीं दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि कोई सामग्री न होने पर ESIC अधिकारी बिना आधार के कर्मचारियों का अंशदान तय नहीं कर सकता था। कोर्ट ने यह भी कहा कि कारोबार 2018 में बंद हो गया था, इसलिए 2023 और 2024 में उस पते पर भेजे गए नोटिस तामील नहीं हो सकते थे। कोर्ट ने 2024 की मांग और 2026 की कुर्की, दोनों रद्द कर दीं, क्योंकि कुर्की पहले आदेश पर ही आधारित थी। ESIC याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा मौका देकर नई कार्यवाही शुरू कर सकता है।

इसका क्या मतलब है

छोटे नियोक्ताओं और पूर्व कारोबारियों के लिए यह फैसला दिखाता है कि कोर्ट ESIC की अंशदान मांग के पीछे कुछ ठोस सामग्री और ऐसा नोटिस चाहता है जो संबंधित व्यक्ति तक वास्तव में पहुंच सके। जहां मांग बिना सुनवाई के तय हुई, वहां कोर्ट ने मांग और उस पर आधारित वसूली, दोनों रद्द कर दीं।

यह फैसला देनदारी को हमेशा के लिए खत्म नहीं करता: ESIC मामला दोबारा खोल सकता है, लेकिन याचिकाकर्ता की सुनवाई करने और उसके स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद ही।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।