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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट: LIC Housing Finance केवल कानूनी तरीके से करे बकाया वसूली

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कर्जदार की याचिका पर, जिसमें एजेंटों द्वारा उत्पीड़न का आरोप था, LIC Housing Finance को बकाया वसूली के लिए जबरदस्ती नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया।

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आधिकारिक स्रोतAndhra Pradesh High Court
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2026 को LIC Housing Finance Ltd को निर्देश दिया कि वह एक कर्जदार से किसी भी बकाया की वसूली केवल कानून द्वारा मान्य प्रक्रिया से करे, जबरदस्ती के तरीकों से नहीं। यह आदेश एक रिट याचिका पर आया, जिसमें कर्जदार ने लोन रिकवरी एजेंटों द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, कर्जदार ने आरोप लगाया कि कर्जदाता ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों, जिनमें 12 अगस्त 2022 का एक मेमो भी शामिल है, का पालन किए बिना रिकवरी एजेंटों को घर भेजा, लगातार फोन किए और पड़ोसियों के सामने अपमानित किया। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि RBI सुनिश्चित करे कि कर्जदाता और उसके एजेंट वसूली से जुड़े RBI के दिशानिर्देशों का पालन करें।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ICICI Bank Ltd v. Prakash Kaur फैसले का हवाला दिया, जिसने, आदेश में उद्धृत अंश के अनुसार, बाहुबली रिकवरी एजेंट रखने की प्रथा की निंदा की थी और कहा था कि कर्जदार के किस्त न चुकाने पर बैंक को कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

आदेश के अनुसार, कर्जदाता ने कहा कि उसने कभी एजेंट नहीं भेजे और वह वसूली के लिए कानून का पालन करना चाहता है। इसलिए कोर्ट ने याचिका लंबित रखने का कोई उद्देश्य नहीं माना और उसका निपटारा करते हुए कर्जदाता को जबरदस्ती के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्जदाता देय राशि की वसूली के लिए कानून के अनुसार कदम उठा सकता है। कोई खर्च नहीं लगाया गया।

इसका क्या मतलब है

कर्जदारों के लिए यह आदेश कोर्ट के इस रुख को दोहराता है कि डिफॉल्ट होने पर कर्जदाता को डराने-धमकाने के बजाय कानूनी वसूली प्रक्रिया अपनानी होगी। यह किसी लोन को रद्द नहीं करता और न ही बकाया घटाता है; कर्जदाता के पास कानूनी तरीके से वसूली का अधिकार बना रहता है।

RBI द्वारा विनियमित किसी कर्जदाता के खिलाफ शिकायत होने पर कर्जदार https://cms.rbi.org.in पर RBI से संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।