कानूनी
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट: DRT तीन साल पुराने SARFAESI मामले का दो हफ्ते में फैसला करे
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम DRT से 2023 से लंबित कर्जदारों की SARFAESI याचिका पर दो हफ्ते में फैसला करने को कहा।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने विशाखापत्तनम के ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) को निर्देश दिया है कि वह बैंक की वसूली कार्रवाई के खिलाफ कर्जदारों की लगभग तीन साल से लंबित याचिका पर दो हफ्ते में फैसला करे। 29 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में खंडपीठ ने City Union Bank की रिट याचिका स्वीकार की और कहा कि कानून ऐसे मामलों का फैसला चार महीने में करने की अपेक्षा करता है।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, दो कर्जदारों ने 2016 से 2022 के बीच गिरवी संपत्ति के बदले City Union Bank से कई कर्ज सुविधाएं ली थीं। बैंक ने 26 अक्टूबर 2022 को इन खातों को NPA घोषित किया और SARFAESI Act के तहत वसूली शुरू की। यह कानून कर्जदाताओं को गिरवी संपत्ति पर कब्जा लेने और उसे बेचने का अधिकार देता है। बैंक ने 2 फरवरी 2023 को मांग नोटिस, फिर कब्जा नोटिस और 25 जुलाई 2023 को नीलामी नोटिस जारी किया।
5 सितंबर 2023 को कर्जदारों ने विशाखापत्तनम DRT में बैंक की वसूली कार्रवाई को चुनौती देते हुए securitisation application दायर की। न्यायाधिकरण ने 7 फरवरी 2025 को अंतरिम रोक लगा दी। बैंक ने हाई कोर्ट को बताया कि दलीलें पूरी हो चुकी थीं, फिर भी न्यायाधिकरण बिना कारण सुनवाई टालता रहा।
कोर्ट ने कहा कि SARFAESI Act की Section 17(5) के तहत DRT को ऐसी याचिका का निपटारा 60 दिन में करना होता है। न्यायाधिकरण लिखित कारण दर्ज करके यह अवधि बढ़ा सकता है, लेकिन कुल अवधि याचिका की तारीख से चार महीने से अधिक नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि संसद का इरादा न्यायाधिकरण को असीमित समय देने का नहीं था, और देरी से बैंक और नीलामी में संपत्ति खरीदने वालों को नुकसान होता है। कोर्ट ने Indian Overseas Bank v. Radhey Infra Solutions मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि DRT को इस समय सीमा का पालन करना होगा।
कोर्ट ने DRT को निर्देश दिया कि वह आदेश मिलने के दो हफ्ते के भीतर कानून के अनुसार याचिका पर फैसला करे।
इसका क्या मतलब है
जो कर्जदार और गारंटर DRT में बैंक की SARFAESI कार्रवाई को चुनौती देते हैं, और जो कर्जदाता ऐसे मामलों में बचाव करते हैं, वे Section 17(5) में तय चार महीने की सीमा में फैसले की उम्मीद कर सकते हैं। अगर न्यायाधिकरण बिना दर्ज कारणों के मामला लटकाता है, तो यह फैसला दिखाता है कि जल्द फैसले के निर्देश के लिए हाई कोर्ट से संपर्क किया जा सकता है।
स्रोत: High Court judgment
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