कानूनी
उत्तराखंड आयोग ने स्कूटर चोरी का दावा खारिज करने का Oriental Insurance का फैसला सही माना
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि स्कूटर रात भर लावारिस छोड़ा गया था, इसलिए Oriental Insurance ने चोरी का दावा सही तरीके से खारिज किया।
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना है कि The Oriental Insurance Company Limited ने एक स्कूटर मालिक का चोरी का दावा खारिज करके सही किया। 23 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में आयोग ने 2020 के जिला आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को ब्याज के साथ 32,000 रुपये देने को कहा गया था। आयोग ने पाया कि मालिक ने वाहन रात भर लावारिस छोड़ा और उसे बचाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए।
क्या हुआ
स्कूटर 16 सितंबर 2015 से 15 सितंबर 2016 तक दोपहिया पैकेज पॉलिसी में बीमित था और उसकी बीमित घोषित कीमत (पूरे नुकसान पर पॉलिसी से मिलने वाली राशि) 32,000 रुपये थी। मालिक के अनुसार 29 अगस्त 2016 को स्कूटर का पेट्रोल खत्म हो गया और जब वह पेट्रोल लेने गया, तब स्कूटर गायब हो गया। उसने चोरी की सूचना पुलिस को करीब एक महीने बाद दी।
बीमा कंपनी ने जुलाई 2017 में दावा खारिज किया। इसके लिए उसने एक जांचकर्ता की रिपोर्ट का हवाला दिया कि वाहन पूरी रात एक सुनसान जगह पर लावारिस छोड़ा गया था। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, हरिद्वार ने मालिक की शिकायत मंजूर की और 6% सालाना ब्याज के साथ 32,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के 5,000 रुपये देने का आदेश दिया। बीमा कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की।
राज्य आयोग ने कहा कि जांचकर्ता की रिपोर्ट के अनुसार मालिक स्कूटर खड़ा करके दूसरे साधन से घर चला गया और अगली सुबह ही लौटा। आयोग ने यह भी दर्ज किया कि अपील के दौरान पेश की गई एक चाबी बीमा कंपनी के जांचकर्ता को बिना इस्तेमाल जैसी और स्कूटर के मॉडल से मेल न खाने वाली लगी, जिससे आयोग के अनुसार दावे पर और संदेह हुआ। आयोग ने कहा कि दावा उचित सावधानी न बरतने के आधार पर खारिज हुआ था, सूचना में देरी के आधार पर नहीं, इसलिए आंशिक भुगतान भी नहीं दिया जा सकता। शिकायत खारिज कर दी गई और खर्च के बारे में कोई आदेश नहीं दिया गया।
इसका क्या मतलब है
वाहन मालिकों के लिए यह फैसला बताता है कि बीमित वाहन को रात भर लावारिस छोड़ना उचित सावधानी न बरतना माना जा सकता है और सिर्फ इसी आधार पर चोरी का दावा खारिज हो सकता है। ऐसे मामले में आयोग ने घटाकर आंशिक भुगतान देने से भी इनकार किया। यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। विवादित दावे वाले पॉलिसीधारक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) से संपर्क कर सकते हैं या e-Daakhil के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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