कानूनी
राजस्थान हाई कोर्ट ने पुलिस से AU Small Finance Bank को गिरवी संपत्ति का कब्जा लौटाने को कहा
राजस्थान हाई कोर्ट ने श्रीगंगानगर पुलिस को 15 दिन में AU Small Finance Bank को गिरवी संपत्ति का कब्जा लौटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जब बैंक ने कहा कि कर्जदार उसमें फिर घुस गए।
राजस्थान हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक, श्रीगंगानगर और केसरीसिंहपुर थाने के थानाधिकारी को AU Small Finance Bank को एक गिरवी संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने का निर्देश दिया है। 14 अक्टूबर 2026 के आदेश में जोधपुर पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद है कि पुलिस आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर कार्रवाई करेगी।
क्या हुआ
आदेश में दर्ज बैंक की दलीलों के अनुसार, बैंक ने तीन कर्जदारों को लोन दिया था, लोन नहीं चुकाया गया और खाते को NPA, यानी ऐसा लोन जिसकी अदायगी रुक गई हो, घोषित किया गया। इसके बाद बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के तहत कार्यवाही शुरू की और 5 मई 2026 को पुलिस की मदद से गिरवी संपत्ति पर कब्जा ले लिया।
बैंक ने अदालत को बताया कि बाद में कर्जदार ताला तोड़कर जबरन संपत्ति में घुस गए। बैंक के अनुसार उसने कब्जा वापस दिलाने के लिए पुलिस अधीक्षक और थानाधिकारी से संपर्क किया, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बैंक ने कब्जा वापस दिलाने, आपराधिक कार्रवाई, खर्च और मुआवजे की मांग की।
बैंक के वकील को सुनने के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए दोनों पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर गिरवी संपत्ति का कब्जा बैंक को वापस दिलाएं। अदालत ने कहा कि अगर बैंक को कब्जा नहीं लेने दिया गया तो यह कानून की खुली अवहेलना होगी, और चूंकि बैंक पहले ही पुलिस से संपर्क कर चुका है, पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। आदेश में कर्जदारों की ओर से किसी की उपस्थिति दर्ज नहीं है।
इसका क्या मतलब है
जिन कर्जदारों की संपत्ति कर्जदाता ने SARFAESI Act के तहत अपने कब्जे में ली है, उनके लिए यह आदेश दिखाता है कि हाई कोर्ट ने बैंक के आरोप के अनुसार संपत्ति में दोबारा घुसने को ऐसा मामला माना जिसे पुलिस को कानून के अनुसार ठीक करना है।
आदेश में बैंक की आपराधिक कार्रवाई, खर्च या मुआवजे की बाकी मांगों पर कोई निर्देश नहीं है। अदालत ने पुलिस को प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर कार्रवाई करने को कहा।
स्रोत: High Court judgment
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