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कानूनी

पंजाब आयोग ने Oriental Insurance पर आग के दावे में 31.5 लाख रुपये का आदेश रद्द किया

पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि डिस्चार्ज वाउचर पर हस्ताक्षर कर 88.46 लाख रुपये स्वीकार करने वाला दुकान मालिक Oriental Insurance से और रकम नहीं मांग सकता।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें The Oriental Insurance Company Limited को आग के एक दावे पर 31.53 लाख रुपये और देने को कहा गया था। 21 अक्टूबर 2026 के अपने फैसले में आयोग ने कहा कि बीमित दुकान मालिक डिस्चार्ज वाउचर पर हस्ताक्षर करके 88.46 लाख रुपये पूरा और अंतिम निपटान के तौर पर पहले ही स्वीकार कर चुका था, इसलिए वह बाकी रकम का दावा नहीं कर सकता।

क्या हुआ

तरनतारन का एक किराना कारोबार 1 नवंबर 2021 से 30 अक्टूबर 2022 तक Oriental Insurance से बीमित था। 17 नवंबर 2021 को शॉर्ट सर्किट से लगी आग में उसका स्टॉक, फर्नीचर-फिटिंग, फ्रीजर और इमारत क्षतिग्रस्त हो गए। बीमा कंपनी के सर्वेयर ने नुकसान 1.35 करोड़ रुपये आंका, जबकि बीमा राशि 1.20 करोड़ रुपये थी।

एक पिछली शिकायत में जिला आयोग ने 8 जून 2023 को बीमा कंपनी को 88,46,630 रुपये देने का आदेश दिया, जो चुका दिए गए। कारोबार ने डिस्चार्ज वाउचर (भुगतान को पूरा और अंतिम मानने की रसीद) और सब्रोगेशन पत्र (नुकसान से जुड़े अपने अधिकार बीमा कंपनी को सौंपने का पत्र) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उसने बाकी रकम के लिए दूसरी शिकायत दायर की और कहा कि हस्ताक्षर दबाव में किए गए थे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, तरनतारन ने 27 सितंबर 2024 को 31,53,370 रुपये और, साथ में 2 लाख रुपये मुआवजा और 50,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया।

राज्य आयोग ने कहा कि कारोबार ने बिना कोई आपत्ति दर्ज किए रकम स्वीकार की थी और दबाव का कोई सबूत पेश नहीं किया, इसलिए दबाव का सामान्य आरोप काफी नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि दूसरी शिकायत उसी मामले पर थी जिसका फैसला पहले हो चुका था, इसलिए उसे स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए था। अपील मंजूर हुई और बीमा कंपनी द्वारा जमा 18,75,077 रुपये सीमा अवधि के बाद उसे लौटाए जाएंगे।

इसका क्या मतलब है

पॉलिसीधारकों के लिए यह फैसला बताता है कि हस्ताक्षरित डिस्चार्ज वाउचर कितना अहम हो सकता है। आदेश के अनुसार, अगर दावेदार बिना आपत्ति के भुगतान को पूरा और अंतिम मानकर स्वीकार कर लेता है, तो बाद में बाकी रकम का दावा विफल हो सकता है, जब तक यह सबूत न हो कि वाउचर दबाव में साइन कराया गया। यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। विवाद राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil के जरिए उठाए जा सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।