कानूनी
पंजाब आयोग ने Care Health को कैंसर इलाज के खारिज दावे पर 5 लाख रुपये देने को कहा
पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने Care Health Insurance को ब्याज के साथ 5 लाख रुपये देने का आदेश बरकरार रखा और कहा कि पहले से मौजूद बीमारी छिपाना साबित नहीं हुआ।
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें Care Health Insurance Limited को कैंसर इलाज के खारिज किए गए दावे पर ब्याज के साथ 5 लाख रुपये देने को कहा गया था। 14 अक्टूबर 2026 के फैसले में आयोग ने एक अलग आदेश भी बरकरार रखा कि बीमा कंपनी को परिवार की हेल्थ पॉलिसी का नवीनीकरण करना होगा।
क्या हुआ
एक पॉलिसीधारक और उसका परिवार 11 नवंबर 2022 से 10 नवंबर 2023 तक एक ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी में बीमित थे, जिसमें Punjab Gramin Bank मास्टर पॉलिसीधारक था। उसकी पत्नी का नई दिल्ली के एक अस्पताल में कैंसर का इलाज हुआ, जिस पर 5,33,664 रुपये खर्च हुए। Care Health ने कैशलेस अनुरोध यह कहकर ठुकरा दिया कि उन्होंने 2017 के ब्रेस्ट कैंसर की पहले से मौजूद बीमारी का खुलासा नहीं किया था।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, अमृतसर ने 12 जुलाई 2024 को बीमा कंपनी को शिकायत की तारीख से 7% सालाना ब्याज के साथ 5 लाख रुपये की बीमा राशि, 20,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया।
राज्य आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने सिर्फ अस्पताल के डिस्चार्ज समरी की एक पंक्ति पर भरोसा किया और पहले के इलाज का कोई मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया। आयोग के अनुसार अस्पताल के कागजों में दर्ज मरीज का इतिहास तब तक छिपाने का सबूत नहीं है, जब तक उसका स्रोत न बताया जाए। आयोग ने यह भी कहा कि पहले का ब्रेस्ट कैंसर और मौजूदा बीमारी आपस में जुड़ी नहीं थीं, और पॉलिसी की अपनी परिभाषा के अनुसार कोई बीमारी तभी पहले से मौजूद मानी जाती है जब उसका पता या इलाज पॉलिसी शुरू होने से 48 महीने के भीतर हुआ हो, और यह अवधि बीत चुकी थी। बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी गई और उसके द्वारा जमा रकम, ब्याज सहित, पॉलिसीधारक को दी जाएगी।
दूसरी अपील में आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी उसी खुलासा न करने के आधार पर पॉलिसी के नवीनीकरण से इनकार नहीं कर सकती, जिसे पहले ही अनुचित पाया जा चुका है।
इसका क्या मतलब है
हेल्थ बीमा खरीदारों के लिए यह फैसला बताता है कि खुलासा न करने के आधार पर दावा खारिज करने वाली बीमा कंपनी को इसे मेडिकल सबूत से साबित करना होगा, सिर्फ डिस्चार्ज समरी के एक नोट से नहीं। यह भी साफ होता है कि पहले से मौजूद बीमारी के लिए पॉलिसी की अपनी तय अवधि मायने रखती है, और अनुचित पाए गए इनकार के आधार पर नवीनीकरण नहीं रोका जा सकता। यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। दावा खारिज होने पर पॉलिसीधारक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil का इस्तेमाल कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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