कानूनी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Canara Bank को साइबर फ्रॉड होल्ड वाला कारोबारी खाता खोलने का आदेश दिया
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Canara Bank को एक कारोबार का चालू खाता अनफ्रीज करने का निर्देश दिया और कहा कि केवल विवादित राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को Canara Bank को एक कारोबार का चालू खाता अनफ्रीज करने और उसे खाता चलाने की अनुमति देने का निर्देश दिया। अदालत ने आदेश दिया कि याचिका में बताई गई केवल विवादित राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए, जब तक तीन महीने के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश न आ जाए।
क्या हुआ
खाताधारक, एक प्रोप्राइटरशिप फर्म, ने रिट याचिका दायर कर Canara Bank में अपने खाते पर लगी रोक हटाने की मांग की। उसका कहना था कि यह रोक बिना किसी कानूनी अधिकार या आदेश के लगाई गई थी। उसके वकील ने दलील दी कि मामला हाई कोर्ट के दो पुराने फैसलों के दायरे में आता है।
पहले फैसले में, 2024 में, अदालत ने बैंकों को निर्देश दिया था कि साइबर अपराध एजेंसियों द्वारा बताई गई राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाए, जो तीन महीने के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आने के बाद ही जारी होगी। दूसरे फैसले में, 27 जुलाई 2026 को, जबलपुर पीठ ने गृह मंत्रालय की 10 अप्रैल 2026 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का हवाला दिया, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली के जरिए होल्ड किए गए खातों के लिए है, और दिशानिर्देश तय किए। इनके तहत पुलिस को आमतौर पर केवल संदिग्ध राशि तक ही लियन या डेबिट फ्रीज का निर्देश देना चाहिए; पूरा खाता फ्रीज करना केवल असाधारण मामलों में, लिखित कारण दर्ज करके, किया जाना है।
अदालत ने माना कि दोनों फैसले इस मामले पर लागू होते हैं। उसने विवादित राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने और खाता अनफ्रीज करने का आदेश दिया। अगर तीन महीने में मजिस्ट्रेट का कोई आदेश नहीं आता, तो खाताधारक पुलिस को सूचना देकर यह जमा राशि निकाल सकता है। किसी अन्य एंट्री पर शिकायत मिलने पर बैंक SOP के तहत कार्रवाई कर सकता है।
इसका क्या मतलब है
जिन ग्राहकों के खाते साइबर फ्रॉड की शिकायत पर फ्रीज होते हैं, उनके लिए यह आदेश दोहराता है कि होल्ड विवादित राशि तक सीमित होना चाहिए, पूरे बैलेंस पर नहीं। अदालत द्वारा लागू दिशानिर्देशों के तहत बैंक पहला संपर्क बिंदु है: उसे ग्राहक को फ्रीज और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी देनी चाहिए और सात दिनों के भीतर शिकायत पोर्टल पर अपलोड करनी चाहिए। जांच अधिकारी को पंद्रह दिनों में फैसला करना होगा, जिसके बाद मामला जिला शिकायत निवारण अधिकारी के पास जा सकता है। साइबर फ्रॉड की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है।
स्रोत: High Court judgment
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