कानूनी
MP उपभोक्ता आयोग ने गलत पॉलिसी पर Tata Motors Finance के खिलाफ 45,000 रुपये का मुआवजा बरकरार रखा
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने Tata Motors Finance के खिलाफ 45,000 रुपये का मुआवजा बरकरार रखा और माना कि फाइनेंस की गई टैक्सी का प्राइवेट कार पॉलिसी में बीमा कराना सेवा में कमी थी।
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने 15 अक्टूबर 2026 को Tata Motors Finance Ltd की अपील खारिज कर दी और एक कर्जदार को 45,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा। आयोग ने माना कि फाइनेंस कंपनी ने किराये पर सवारी ढोने के लिए पंजीकृत कर्जदार के वाहन का बीमा प्राइवेट कार पॉलिसी में कराकर सेवा में कमी की।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, कर्जदार ने 3 जनवरी 2013 को Tata Sumo खरीदने के लिए फाइनेंस कंपनी से 5,60,000 रुपये का वाहन लोन लिया था, जिसमें बीमा की राशि भी शामिल थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि वाहन किराये पर सवारी ढोने के लिए पंजीकृत था और किस्तें पूरी होने तक उसका बीमा कराना फाइनेंसर की जिम्मेदारी थी।
पहले साल की पॉलिसी पैसेंजर कैरिंग पैकेज पॉलिसी थी। फाइनेंस कंपनी के जरिए कराई गई 2013-14 और 2014-15 की पॉलिसियां प्राइवेट कार पॉलिसी के रूप में जारी हुईं। 29 अप्रैल 2014 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि बीमा कंपनी सागर की अदालत में दुर्घटना के दावे का विरोध इस आधार पर कर रही है कि टैक्सी का बीमा प्राइवेट कार पॉलिसी में हुआ था।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, सागर ने 12 जुलाई 2018 को फाइनेंस कंपनी को एक महीने में 45,000 रुपये देने, समय पर भुगतान न करने पर 6% सालाना ब्याज देने और 2,000 रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया। फाइनेंस कंपनी ने अपील की और दलील दी कि कर्जदार ने वाहन का सही ब्योरा नहीं दिया था।
राज्य आयोग ने यह दलील नहीं मानी। उसने कहा कि बिना किसी जांच के अनुमान के आधार पर पॉलिसी जारी कराना अपने आप में फाइनेंस कंपनी की लापरवाही और सेवा में कमी दिखाता है, और कंपनी यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे सकी कि कर्जदार ने क्या जानकारी दी थी। आयोग ने मुआवजे को उचित माना और दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च खुद उठाने को कहा।
इसका क्या मतलब है
इस आदेश के अनुसार, जब कर्ज देने वाली कंपनी फाइनेंस किए गए वाहन का बीमा कराती है, तो उसे सही प्रकार की पॉलिसी लेनी होगी, और वह बिना सबूत के कर्जदार पर दोष नहीं डाल सकती। जिन कर्जदारों के लोन में बीमा शामिल है, वे जांच सकते हैं कि पॉलिसी वाहन के पंजीकरण और इस्तेमाल से मेल खाती है या नहीं। ऐसी शिकायत वाले उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर संपर्क कर सकते हैं या e-Daakhil के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उपभोक्ता आयोग के आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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