कानूनी
केरल हाई कोर्ट: अंतरिम SARFAESI आदेश के खिलाफ अपील में भी प्री-डिपॉजिट जरूरी
केरल हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि DRAT में अपील के लिए अंतरिम आदेश के खिलाफ भी प्री-डिपॉजिट जरूरी है, और अपीलकर्ताओं को बकाया कर्ज का 25% जमा करने के लिए तीन हफ्ते दिए।
केरल हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 12 अक्टूबर 2026 को कहा कि कर्जदार को ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (DRAT) में अपील के लिए तय प्री-डिपॉजिट करना होगा, चाहे चुनौती दिया गया आदेश सिर्फ अंतरिम ही क्यों न हो। मामला SARFAESI Act के तहत Federal Bank Limited की वसूली कार्रवाई से जुड़ा था।
क्या हुआ
अपीलकर्ताओं ने हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
पीठ ने इसी कोर्ट की समकक्ष पीठों के दो पुराने फैसलों का सहारा लिया। उन फैसलों में कहा गया था कि SARFAESI Act धारा 17 के तहत दिए गए आवेदन पर पारित अंतरिम और अंतिम आदेश में कोई फर्क नहीं करता, और धारा 18 के तहत अपील पर सुनवाई के लिए प्री-डिपॉजिट एक शर्त है।
अपीलकर्ताओं के वकील ने बकाया कर्ज का 25% जमा करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि संपत्तियों का मूल्यांकन DRAT के सामने रखा गया है, ताकि वह विचार कर सके कि क्या एक संपत्ति बेचकर बैंक का बकाया चुकाया जा सकता है।
कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को बकाया कर्ज का 25% जमा करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया। कोर्ट ने कहा कि जमा न करने पर DRAT में अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। रिट अपील का निपटारा कर दिया गया।
इसका क्या मतलब है
SARFAESI Act के तहत वसूली कार्रवाई झेल रहे कर्जदारों के लिए इस फैसले का मतलब है कि धारा 17 के आवेदन पर दिए गए आदेश के खिलाफ DRAT में अपील प्री-डिपॉजिट के बिना नहीं सुनी जाएगी, चाहे वह आदेश अंतरिम हो या अंतिम। इस मामले में कोर्ट ने जमा राशि बकाया कर्ज का 25% तय की और तीन हफ्ते की समय सीमा दी।
ऐसे आदेश के खिलाफ अपील की योजना बना रहे कर्जदारों को तय समय में जमा राशि का इंतजाम करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि कोर्ट ने साफ किया है कि इसके बिना अपील स्वीकार नहीं होगी।
स्रोत: High Court judgment
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