कानूनी
केरल हाई कोर्ट: पुलिस विवादित राशि न बताए तो Federal Bank खाते से रोक हटाए
केरल हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस विवादित राशि न बताए तो पूरा खाता फ्रीज नहीं रह सकता, और Federal Bank व पुलिस के लिए समय-सीमा तय की।
केरल हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को Federal Bank को निर्देश दिया कि अगर पुलिस तय समय में विवादित राशि नहीं बताती, तो वह ग्राहक के खाते पर लगी रोक हटा दे। अदालत ने कहा कि जब पुलिस के अनुरोध में राशि ही नहीं बताई गई, तो खाताधारक को खाता चलाने से पूरी तरह रोकना अन्याय होगा।
क्या हुआ
खाताधारक कतर में रहते हैं और उन्होंने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के जरिए याचिका दायर की। उन्होंने विजयवाड़ा पुलिस के अनुरोध पर Federal Bank खाते पर लगाए गए डेबिट फ्रीज को चुनौती दी। उनका कहना था कि वे इस मामले में आरोपी नहीं हैं और उनका इससे कोई संबंध नहीं है। बैंक ने अदालत को बताया कि अनुरोध में विवादित राशि नहीं बताई गई थी, इसलिए उसने पूरा खाता फ्रीज कर दिया। नोटिस के बावजूद विजयवाड़ा पुलिस की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
अदालत ने अपने पुराने फैसलों का जिक्र किया, जिनमें बैंकों को निर्देश दिया गया था कि वे खाताधारकों को खाता चलाने दें और लियन को अनुरोध में बताई गई राशि तक सीमित रखें, बशर्ते बैंक को यह संदेह न हो कि खाता साइबर अपराध या मनी म्यूल खाते के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। अदालत ने गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की 2026 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का भी हवाला दिया, जिसका Clause 10 समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था देता है।
अदालत ने बैंक को आदेश दिया कि वह फैसले की प्रति मिलने के दो हफ्ते के भीतर पुलिस से विवादित राशि का ब्योरा मांगे। पुलिस को एक महीने में जवाब देना होगा; ऐसा न होने पर बैंक को रोक हटानी होगी। राशि बताए जाने पर बैंक को फ्रीज केवल उसी राशि तक सीमित करना होगा और खाता चलाने देना होगा।
इसका क्या मतलब है
जिन ग्राहकों का पूरा खाता बिना राशि बताए पुलिस अनुरोध पर फ्रीज होता है, उनके लिए यह आदेश दिखाता है कि अदालत ने होल्ड को विवादित राशि तक सीमित करने को कहा। रोकी गई राशि का निपटारा SOP के तहत होगा, और खाताधारक उसके Clause 10 की शिकायत प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। भविष्य के किसी अनुरोध पर बैंक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। साइबर फ्रॉड की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है।
स्रोत: High Court judgment
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।