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केरल हाई कोर्ट ने Bank of India नॉन-कॉलेबल FD बंद करने के मामले में आदेश रद्द किया

केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि Bank of India की नॉन-कॉलेबल फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले बंद कराने की रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि विवाद अनुबंध से जुड़ा है।

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आधिकारिक स्रोतKerala High Court
कानूनी / 24 अक्टूबर 2026

केरल हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने 13 October 2026 को Bank of India की अपील स्वीकार करते हुए वह रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें 1 करोड़ रुपये और 2 करोड़ रुपये की दो नॉन-कॉलेबल फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले बंद कराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि विवाद एक अनुबंध से पैदा हुआ है और इसमें ऐसे तथ्य हैं जिनके लिए सबूत चाहिए, इसलिए इसे रिट याचिका में तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 16 July 2026 के सिंगल जज के फैसले को रद्द कर दिया।

क्या हुआ

जमाकर्ता केरल स्टेट निर्मिति केंद्र, जो केरल सरकार का उपक्रम है, ने अपनी याचिका में कहा था कि उसने बैंक में 17 करोड़ रुपये कई फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे थे, जिन्हें नॉन-कॉलेबल श्रेणी में रखा गया था, यानी ऐसी जमा जो मैच्योरिटी से पहले नहीं निकाली जा सकती। उसने कहा कि उसे वेतन और वैधानिक देनदारियों के लिए पैसे की जरूरत थी और शाखा के एक अधिकारी ने भरोसा दिलाया था कि जुर्माना देकर समय से पहले बंद करने की अनुमति मिलेगी।

बैंक ने नॉन-कॉलेबल डिपॉजिट पर RBI के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए अनुरोध ठुकरा दिया। अपने हलफनामों में बैंक ने कहा कि दोनों डिपॉजिट 450 दिन के थे, जो 3 September 2026 और 17 September 2026 को मैच्योर होने थे। बैंक के अनुसार उसकी योजना में समय से पहले निकासी सिर्फ तभी हो सकती है जब जमाकर्ता दिवालिया हो जाए, वह कंपनी हो और कोर्ट उसे बंद करने का आदेश दे, या जमाकर्ता की मृत्यु हो जाए, और ऐसी जमा पर सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा ब्याज मिलता है। बैंक ने कहा कि RBI के सर्कुलर बैंकों को ऐसी जमा देने की अनुमति देते हैं, जिनकी न्यूनतम राशि 1 करोड़ रुपये से ऊपर होती है, और जमाकर्ता ने सोच-समझकर यह योजना चुनी थी।

कोर्ट ने कहा कि शर्तें ठीक से समझाई गई थीं या नहीं, यह एक विवादित तथ्य है। पक्षों के अधिकार योजना, जमा रसीदों और उनके पत्रों से तय होते हैं, जिन्हें सबूत देखे बिना तय नहीं किया जा सकता।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला यह तय नहीं करता कि डिपॉजिट समय से पहले बंद हो सकते थे या नहीं। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा कि इस अनुबंध विवाद के लिए रिट याचिका सही रास्ता नहीं थी। कोर्ट ने उन सिद्धांतों का हवाला दिया कि पूरी तरह अनुबंध से जुड़े विवाद उनके लिए बने उपायों, जैसे सिविल कोर्ट, पर छोड़े जा सकते हैं।

जमाकर्ताओं के लिए यह मामला दिखाता है कि नॉन-कॉलेबल डिपॉजिट, जैसा इस मामले में बैंक ने बताया, कुछ सीमित स्थितियों को छोड़कर मैच्योरिटी तक बंद रहती है। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर दर्ज की जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।