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कानूनी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी केस और ED समन रद्द करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने Generis Consulting Services की एक डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट और ED समन रद्द करने से इनकार किया और कहा कि निवेशकों के आरोपों की जांच ट्रायल में होगी।

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आधिकारिक स्रोतKarnataka High Court
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 17 अक्टूबर 2026 को Generis Consulting Services Private Limited की एक डायरेक्टर के खिलाफ पुलिस की चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया। इस मामले में निवेशकों का आरोप है कि उन्हें अच्छे मुनाफे का वादा किया गया और पैसा वापस नहीं किया गया। अदालत ने इससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ED के समन के खिलाफ डायरेक्टर की याचिका भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में पूरा ट्रायल ज़रूरी है।

क्या हुआ

आदेश में दर्ज अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता और अन्य लोगों से अच्छे मुनाफे का भरोसा देकर कंपनी की परियोजनाओं में पैसा लगवाया। अभियोजन का आरोप है कि 2020 में जब शिकायतकर्ता ने पैसा वापस मांगा, तो आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की, धमकी दी और 5,90,82,467 रुपये (लगभग 5.91 करोड़ रुपये) रोक लिए। बेंगलुरु पुलिस ने जनवरी 2021 में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाज़ी समेत कई अपराधों में चार्जशीट दाखिल की थी।

आरोपी नंबर 6, यानी डायरेक्टर, ने दलील दी कि पैसा एक अन्य आरोपी, कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास गया और उनकी कोई विशेष भूमिका नहीं थी। अदालत ने कहा कि इस बात पर विवाद नहीं है कि कंपनी में उनकी 50% हिस्सेदारी थी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंपनी की ओर से काम करने के लिए अधिकृत थीं। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के ज़रूरी तत्व बनते हैं या नहीं, यह तथ्य और कानून का मिला-जुला सवाल है, जिसका फैसला ट्रायल में होगा, न कि चार्जशीट रद्द करने की याचिका के स्तर पर।

डायरेक्टर ने 19 फरवरी 2026 के ED समन को भी रद्द करने की मांग की थी। चूंकि ED जांच का आधार बना पुलिस मामला ट्रायल में जाएगा, इसलिए अदालत ने कहा कि यह याचिका टिकती नहीं है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

इस आदेश का मतलब है कि डायरेक्टर के खिलाफ आपराधिक मामला और ED की जांच जारी रहेगी।

निवेशकों के लिए यह मामला दिखाता है कि विशेष आरोप होने पर बड़ी हिस्सेदारी वाले डायरेक्टर को ट्रायल का सामना करना पड़ सकता है, भले ही पैसा कथित तौर पर किसी दूसरे अधिकारी के पास गया हो। ऊंचे मुनाफे का वादा करने वाली किसी योजना में पैसा गंवाने वाले लोग RBI के Sachet पोर्टल https://sachet.rbi.org.in पर जानकारी देख सकते हैं या साइबर धोखाधड़ी की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।